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Aditya Prakash Verma: हनीट्रैप के जाल में खुद बने शिकार, 36 साल पुलिस सेवा के बाद राजनीति में आए पूर्व IPS आदित्य प्रकाश वर्मा कौन हैं?

Aditya Prakash Verma Biography: पूर्व IPS आदित्य प्रकाश वर्मा कौन हैं? 36 साल पुलिस सेवा में रहे वर्मा हनीट्रैप केस की जांच के दौरान खुद जाल का हिस्सा बने थे। रिटायरमेंट के बाद राजनीति में आए और अब पार्टी से इस्तीफा चर्चा में है।
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हाथरस

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Dimple Yadav

Aug 22, 2026

Aditya Prakash Verma पूर्व IPS आदित्य प्रकाश वर्मा Aditya Prakash Verma biography Aditya Prakash Verma IPS profile

पूर्व IPS आदित्य प्रकाश वर्मा

Aditya Prakash Verma IPS: उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व IPS अधिकारी आदित्य प्रकाश वर्मा की एंट्री ने अचानक चर्चा जरूर बटोरी, लेकिन उनकी कहानी राजनीति से काफी पुरानी है। करीब तीन दशक से ज्यादा लंबा प्रशासनिक और पुलिस करियर, राज्य पुलिस सेवा से IPS कैडर तक का सफर और नौकरी के दौरान सामाजिक कामों से जुड़ाव, उनकी प्रोफाइल को सामान्य राजनीतिक चेहरों से अलग बनाता है।

रिटायरमेंट के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का हिस्सा बने। पार्टी ने उन्हें हाथरस की सुरक्षित विधानसभा सीट की जिम्मेदारी भी दी। हालांकि, कुछ ही समय बाद उन्होंने संगठन से इस्तीफा दे दिया। ऐसे में अब चर्चा सिर्फ उनके राजनीतिक फैसले की नहीं, बल्कि यह जानने की भी है कि आखिर आदित्य प्रकाश वर्मा कौन हैं और पुलिस की वर्दी से सियासत तक उनका सफर कैसा रहा?

बैंकिंग सेक्टर से शुरू हुआ करियर

आदित्य प्रकाश वर्मा का सरकारी सेवा का सफर सीधे पुलिस से शुरू नहीं हुआ था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने बैंकिंग और प्रशासन से जुड़े कई पदों पर काम किया। इसके बाद 14 जुलाई 1997 को उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में डीएसपी के तौर पर पहली पोस्टिंग मिली। यूपी पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनकी भर्ती तिथि 14 जुलाई 1997 दर्ज है। यानी पुलिस सेवा में आने से पहले ही उनके पास प्रशासनिक और वित्तीय क्षेत्र का अनुभव था। यही अनुभव आगे उनके लंबे सरकारी करियर का हिस्सा बना।

23 साल बाद मिला IPS कैडर

आदित्य प्रकाश वर्मा के करियर का सबसे अहम पड़ाव साल 2020 रहा। करीब 23 साल तक राज्य पुलिस सेवा में काम करने के बाद उन्हें IPS कैडर मिला। यूपी पुलिस के रिकॉर्ड में उन्हें IPS-SPS 2013 बैच के अधिकारी के तौर पर दर्ज किया गया है और 31 अगस्त 2020 की तारीख उनके IPS कैडर से जुड़ी है। उस समय वह कासगंज में अपर पुलिस अधीक्षक के तौर पर तैनात थे। इससे पहले गोरखपुर में SP Traffic और फिर कासगंज में ASP के तौर पर भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। कासगंज में उनकी तैनाती के दौरान कई कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका सामने आई।

हनीट्रैप केस में खुद बने ट्रैप का हिस्सा

उनके पुलिस करियर से जुड़ा एक दिलचस्प मामला 2021 में सामने आया। कासगंज के ASP रहते हुए उन्हें लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोगों को वीडियो कॉल के जरिए फंसाकर ब्लैकमेल किया जा रहा है। मामले की तह तक जाने के लिए वर्मा ने खुद इस गिरोह के संभावित जाल में संपर्क किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद साइबर सेल के जरिए मामले की जांच शुरू हुई और मुकदमा दर्ज कराया गया। यह घटना उनके पुलिस करियर के उन मामलों में रही, जिनमें उन्होंने सिर्फ शिकायतों पर कार्रवाई करने के बजाय खुद मामले की कार्यप्रणाली समझने की कोशिश की।

एटा में एक छात्रा की पढ़ाई की जिम्मेदारी ली

पुलिस सेवा का दूसरा पहलू उनकी सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा है। एटा में 43वीं वाहिनी PAC के कमांडेंट रहते हुए एक स्कूल निरीक्षण के दौरान उनकी नजर एक गरीब लेकिन बेहद प्रतिभाशाली छात्रा शगुफ्ता पर पड़ी। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा ने मुश्किल गणित के सवालों के जवाब भी सही दिए। उसकी प्रतिभा से प्रभावित होकर वर्मा ने उसकी शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। उन्होंने उसका स्कूल में दाखिला कराया और फीस, किताबों तथा ड्रेस आदि का खर्च उठाने की बात कही। यह पहल उनके उस सामाजिक पक्ष को सामने लाती है, जो बाद में राजनीति में उनकी पहचान का भी हिस्सा बना।

43वीं PAC के कमांडेंट रहे, मिला प्रशंसा पदक

आदित्य प्रकाश वर्मा के आधिकारिक यूपी पुलिस प्रोफाइल के मुताबिक वह 43वीं वाहिनी PAC, एटा के कमांडेंट रहे। उनके रिकॉर्ड में DG’s Commendation Disc Silver, 26 जनवरी 2023 भी दर्ज है। सरकारी रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 21 जून 1965 और शैक्षणिक योग्यता M.Tech (Textile Technology) दर्ज है। यह जानकारी उनकी प्रोफाइल को इसलिए दिलचस्प बनाती है क्योंकि उनका करियर सिर्फ पारंपरिक पुलिस सेवा तक सीमित नहीं रहा, उन्होंने बैंकिंग, प्रशासन, राज्य पुलिस सेवा और बाद में IPS कैडर, अलग-अलग स्तरों पर काम किया।

रिटायरमेंट के बाद हाथरस से राजनीति की शुरुआत

जून 2025 में पुलिस सेवा से रिटायर होने के बाद उनका जुड़ाव सामाजिक गतिविधियों से बना रहा। इसके बाद उन्होंने 2026 में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का दामन थामा। पार्टी में शामिल होने के कुछ ही समय बाद उन्हें हाथरस की सुरक्षित विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया गया। इससे यह संकेत मजबूत हुआ कि पार्टी उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका दे सकती है। लेकिन यह राजनीतिक सफर ज्यादा लंबा नहीं चला। 31 जुलाई को जिम्मेदारी मिलने के कुछ ही समय बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। अपने त्यागपत्र में उन्होंने व्यक्तिगत कारणों को वजह बताया है। इसलिए फिलहाल उनके फैसले को किसी राजनीतिक विवाद या मतभेद से जोड़ना उचित नहीं होगा।

वर्दी से सियासत तक, लेकिन कहानी अभी बाकी है

आदित्य प्रकाश वर्मा की कहानी का सबसे अलग पहलू यही है कि उनकी पहचान पहले से बनी हुई थी। 1997 में पुलिस सेवा में एंट्री, 2020 में IPS कैडर, 43वीं PAC की कमान, पुलिस सेवा के दौरान सामाजिक पहल और 2025 में रिटायरमेंट के बाद राजनीति में कदम, यह पूरा सफर कई पड़ावों से होकर गुजरता है। अब आजाद समाज पार्टी से इस्तीफे के बाद बड़ा सवाल उनके अगले कदम को लेकर है। क्या वह फिर सामाजिक क्षेत्र में लौटेंगे, किसी दूसरे राजनीतिक मंच का हिस्सा बनेंगे या सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखेंगे, इसका जवाब फिलहाल उनके अगले फैसले से ही मिलेगा।