
Amyloidosis Symptoms: शरीर पर त्वचा का रंग बदलना या पिगमेंटेशन होना कई वजहों से हो सकता है। लेकिन कुछ मामलों में त्वचा में होने वाला बदलाव अमाइलॉइडोसिस नाम की एक बीमारी का संकेत भी हो सकता है। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार अमाइलॉइडोसिस में शरीर के अंगों में 'अमाइलॉइड' नाम का प्रोटीन जमा होने लगता है। आइए जानते हैं इसके क्या लक्षण दिखाई देते हैं।
अमाइलॉइडोसिस क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर के प्रोटीन अपना सामान्य आकार बदल लेते हैं और असामान्य गुच्छों का रूप ले लेते हैं। ये असामान्य प्रोटीन शरीर के अलग अलग अंगों और ऊतकों में जमा हो सकते हैं। कुछ मामलों में यह बीमारी शरीर के सिर्फ एक अंग या उसके किसी हिस्से तक सीमित रहती है। वहीं कुछ मामलों में शरीर के कई अंग इसकी चपेट में आ सकते हैं। यह बीमारी दिल, किडनी, लिवर और फेफड़ों जैसे अंगों को प्रभावित कर सकती है। इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि अमाइलॉइड प्रोटीन शरीर के किस हिस्से में जमा हो रहा है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार अमाइलॉइडोसिस में त्वचा में भी बदलाव दिखाई दे सकते हैं। इसमें त्वचा पर आसानी से नीले या चोट के निशान पड़ना और आंखों के आसपास बैंगनी रंग के घेरे दिखाई देना शामिल है। वहीं मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार कुछ लोगों की त्वचा पर गहरे या बैंगनी रंग के निशान दिखाई दे सकते हैं। इसे परप्यूरा कहा जाता है। इसमें त्वचा की छोटी रक्त वाहिकाओं से खून बाहर निकलने के कारण ऐसे निशान बन सकते हैं। ये निशान सबसे ज्यादा आंखों के आसपास दिखाई दे सकते हैं। हालांकि शरीर के दूसरे हिस्सों में भी ऐसे निशान हो सकते हैं।
अमाइलॉइडोसिस के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार इस बीमारी में बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। इसके साथ सांस लेने में परेशानी, हाथ या पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या दर्द और टखनों तथा पैरों में सूजन भी हो सकती है। इसके अलावा चक्कर आना, ब्लड प्रेशर कम होना, दस्त, कब्ज, जी मिचलाना, भूख कम लगना और वजन कम होना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। वहीं क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार बहुत ज्यादा थकान, बिना वजह वजन कम होना, कमजोरी या पकड़ कमजोर होना, हाथों में सुन्नपन और त्वचा में बदलाव भी इस बीमारी से जुड़े लक्षण हो सकते हैं।
अमाइलॉइडोसिस के कई प्रकार होते हैं और इसका असर हर व्यक्ति में अलग तरह से हो सकता है। इसलिए त्वचा पर होने वाले बदलावों को केवल सामान्य पिगमेंटेशन मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए, खासकर तब जब ये बदलाव लगातार बने रहें या इनके साथ शरीर में दूसरे लक्षण भी दिखाई दें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।