स्वास्थ्य

Antibiotics Side Effects: एंटीबायोटिक्स खाना कितना खतरनाक, 23 हजार लोगों पर की गई नई शोध में खुलासा

Antibiotics Side Effects: एंटीबायोटिक्स हमारी सेहत के लिए कई बार जीवनरक्षक साबित होते हैं। हाल ही में JAMA Network में छपी एक नई रिसर्च ने इस बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया है।
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Aug 28, 2025
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Harmful effects of antibiotics|फोटो सोर्स- Freepik

Antibiotics Side Effects: एंटीबायोटिक्स हमारी सेहत के लिए कई बार जीवनरक्षक साबित होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दवाओं का गलत या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल आपकी आंतों में छिपे खतरनाक बैक्टीरिया को जगाने का काम कर सकता है? हाल ही में JAMA Network में छपी एक नई रिसर्च ने इस बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया है। आइए, जानते हैं इससे जुड़ी कुछ अहम जानकारी ताकि आप रहें सतर्क।

अध्ययन का क्या है मामला?

इस अध्ययन में इजराइल के Sheba Medical Center के 23 हजार से ज्यादा मरीजों और लगभग 33 हजार अस्पताल रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया गया। रिसर्च में पाया गया कि जिन मरीजों की आंतों में Clostridioides difficile (C. difficile) नाम का बैक्टीरिया बिना किसी लक्षण के मौजूद था, उन्हें अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान गंभीर संक्रमण होने का खतरा कहीं ज्यादा रहा। यानि कि जिन लोगों में यह बैक्टीरिया पहले से चुपचाप मौजूद है, वे पहले ही उच्च-जोखिम वाले मरीज होते हैं।दूसरी ओर, जिनमें यह बैक्टीरिया नहीं है, उनमें एंटीबायोटिक्स के लगातार या लंबे समय तक इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा दोगुना हो जाता है।

कौन-सी दवाएं बढ़ाती हैं खतरा?

रिसर्च के अनुसार कुछ एंटीबायोटिक्स आंतों की गुड बैक्टीरिया यानी फायदेमंद जीवाणुओं को खत्म कर देती हैं, जिससे C. difficile फैलने का मौका पा जाता है। इनमें खासतौर पर शामिल हैं।

  • फ्लोरोक्विनोलोन
  • क्लिंडामाइसिन
  • थर्ड-जेनरेशन सेफालोस्पोरिन
  • पेनिसिलिन-बेटा लैक्टमेस इनहिबिटर
  • कार्बापेनेम्स

किन लोगों को है ज्यादा खतरा?

  • बुजुर्ग मरीज
  • पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोग
  • एसिड दबाने वाली दवाएं (acid-suppressing medicines) लेने वाले
  • पहले C. difficile संक्रमण झेल चुके मरीज

अस्पतालों में सावधानी क्यों जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बैक्टीरिया को कई बार साधारण दस्त या फूड पॉइजनिंग समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। समय पर टेस्टिंग न होने से संक्रमण की असली वजह पकड़ में नहीं आती। यही कारण है कि अस्पतालों में रोकथाम और सतर्कता बेहद जरूरी है।

संक्रमण से बचाव के उपाय

  • एंटीबायोटिक्स का समझदारी से इस्तेमाल
  • दस्त होने पर समय पर टेस्टिंग
  • हाथों की सफाई और हाइजीन का पालन
  • अस्पताल में बार-बार छूई जाने वाली सतहों की सफाई
  • जरूरत पड़ने पर मरीज को आइसोलेशन में रखना
  • हेल्थकेयर स्टाफ की ट्रेनिंग और जागरूकता
  • प्रोबायोटिक्स का उपयोग (सस्ते और सहायक विकल्प के तौर पर)
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
28 Aug 2025 01:59 pm
Published on:
28 Aug 2025 01:17 pm
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