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Human Body after Death: मौत के बाद भी तुरंत बंद नहीं होता शरीर! जानिए कौन सा अंग कब तक रहता है जिंदा

Human Body after Death: मौत के बाद शरीर के अलग-अलग अंग अलग समय पर काम करना बंद करते हैं। जानिए दिमाग, दिल, किडनी और आंखें कब तक काम करती हैं और क्यों महत्वपूर्ण है समय।

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भारत

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Dimple Yadav

Feb 12, 2026

Human Body after Death

Human Body after Death (Photo- gemini ai)

Human Body after Death: जब किसी इंसान की मौत होती है तो शरीर एकदम से पूरी तरह बंद नहीं हो जाता। शरीर के अलग-अलग अंग अलग-अलग समय पर काम करना बंद करते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस अंग को कितनी ऑक्सीजन और खून की जरूरत होती है। इसी वजह से कुछ अंग मौत के बाद भी थोड़ी देर तक काम करने लायक रहते हैं और उन्हें ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

सबसे पहले दिमाग बंद होता है

मौत के बाद सबसे पहले दिमाग काम करना बंद करता है। दिमाग को शरीर के बाकी अंगों की तुलना में ज्यादा ऑक्सीजन चाहिए होती है। जैसे ही दिल धड़कना बंद करता है, दिमाग तक ऑक्सीजन पहुंचनी भी बंद हो जाती है। ऑक्सीजन न मिलने पर 4 से 7 मिनट के भीतर दिमाग की कोशिकाएं मरने लगती हैं। इसे ब्रेन डेथ कहा जाता है और मेडिकल साइंस में इसे मौत का पक्का संकेत माना जाता है।

इसके बाद दिल और फेफड़े

दिल और फेफड़े एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, इसलिए आमतौर पर दोनों लगभग एक ही समय पर बंद हो जाते हैं। जब दिल खून पंप करना बंद करता है तो फेफड़े भी काम नहीं कर पाते। हालांकि अस्पताल में मशीनों की मदद से कुछ समय तक अंगों को ऑक्सीजन दी जा सकती है। ट्रांसप्लांट के लिए दिल और फेफड़े आमतौर पर मौत के बाद 4 से 6 घंटे तक सुरक्षित रखे जा सकते हैं, अगर उन्हें तुरंत सही तरीके से संरक्षित किया जाए।

कुछ घंटों बाद लिवर और पैंक्रियास

लिवर, पैंक्रियास और आंत जैसे अंग थोड़े समय बाद खराब होने लगते हैं। खून का प्रवाह रुकने के 8 से 18 घंटे के अंदर इनकी कार्यक्षमता तेजी से कम होने लगती है। अगर इन्हें ठंडे तापमान में सुरक्षित न रखा जाए तो ये जल्दी खराब हो जाते हैं।

सबसे ज्यादा देर तक चलने वाले अंग

किडनी शरीर के मजबूत अंगों में से एक है। सही तरीके से ठंडा रखकर इसे 24 से 36 घंटे तक ट्रांसप्लांट के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। आंख की कॉर्निया तो और भी ज्यादा समय तक सुरक्षित रहती है। यह कम ऑक्सीजन पर भी टिक सकती है, इसलिए मौत के बाद लगभग 14 दिन तक दान के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

त्वचा और हड्डियां सबसे अंत में

त्वचा और हड्डियों जैसे ऊतक सबसे देर से खराब होते हैं। सही तरीके से संरक्षित करने पर इन्हें कई दिनों या सालों तक इस्तेमाल किया जा सकता है। यही कारण है कि स्किन ग्राफ्ट और बोन ट्रांसप्लांट लंबे समय बाद भी संभव होते हैं।

समय क्यों है इतना जरूरी

अंगों के बंद होने का यह क्रम डॉक्टरों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। ट्रांसप्लांट तभी सफल होता है जब अंग सही समय सीमा के अंदर सुरक्षित निकाल लिए जाएं। कुछ अंग जल्दी खराब हो जाते हैं, जबकि कुछ ज्यादा समय तक सुरक्षित रहते हैं। सबसे पहले दिमाग बंद होता है, फिर दिल और फेफड़े, उसके बाद लिवर और पैंक्रियास। किडनी और कॉर्निया ज्यादा देर तक सुरक्षित रहती हैं, जबकि त्वचा और हड्डियां सबसे आखिर में खराब होती हैं। यह पूरी प्रक्रिया हमें बताती है कि इंसानी शरीर कितना नाजुक भी है और कितना मजबूत भी। सही समय पर अंगदान कई लोगों की जान बचा सकता है।