
इस बीमारी से अब तक 5 में से दो मरीज़ों की मौत भी हो चुकी है। इस बीमारी का नाम है क्रीमिया-कांगो रक्तस्रावी बुखार (Crimean-Congo Haemorrhagic Fever) इस बीमारी में मरीज़ों को बुखार आने के साथ नाक से खून आना शुरू हो जाता है। संक्रमण के दूसरे हफ्ते में मरीज़ की स्थिति और बिगड़ जाती है, जिससे चिंता बढ़ रही है।
CCHF के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 2 से 14 दिनों के बाद दिखाई देते हैं। प्रारंभिक लक्षण हल्के होते हैं और आमतौर पर अन्य बीमारियों के लक्षणों से मिलते-जुलते होते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं।
CCHF के कुछ विशिष्ट लक्षण निम्नलिखित हैं:
बुखार (100.4°F या उससे अधिक)
ठंड लगना
मांसपेशियों में दर्द
सिरदर्द
मतली और उल्टी
नाक से खून बहना
रक्तस्राव
खून के थक्के जमने में समस्या
अंगों की विफलता
CCHF का निदान आमतौर पर रक्त परीक्षण के माध्यम से किया जाता है।
CCHF का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। उपचार का उद्देश्य लक्षणों को नियंत्रित करना और जटिलताओं को रोकना है। उपचार में आमतौर पर तरल पदार्थ, दर्द निवारक और एंटीबायोटिक्स शामिल होते हैं।
CCHF से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
- टिक्स के काटने से बचें।
- टिक्स के काटने के बाद खुद को अच्छी तरह से चेक करें।
- यदि आपको टिक काटता है, तो उसे जल्द से जल्द हटा दें।
- यदि आपको क्रीमिया-कांगो रक्तस्रावी बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
CCHF एक गंभीर बीमारी है, लेकिन यदि समय पर उपचार किया जाए तो इससे बचने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके अतिरिक्त कई बार शरीर के अंदर कई अंगों से खून का रिसाव शुरू हो जाता है। जब शरीर में रिसाव होता है तब नाक से खून आने लगता है।
क्रीमिया-कांगो रक्तस्रावी बुखार संक्रमण फैलने की वजह
ये बीमारी जानवरों के जरिए ही मनुष्य में आती है। एनिमल बग यानि पशुओं के शरीर में पाए जाने वाले कीड़ो से भी यह रोग फैल सकता है। पशुओं से इंसान और दूसरे इंसान में ये बीमारी फैल रही है। हालांकि, इस बात का पता नहीं चल सका है कि अचानक से इस बीमारी के बढ़ने की वजह क्या है। यदि किसी में बुखार के साथ नोज से ब्लीडिंग हो रही हो तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और स्वस्थ लोगों को उनसे दूरी बना कर रखनी चाहिए।