नीली चाय सुनकर आपको थोड़ी हैरत तो होगी, लेकिन इसके गुण भी बहुत हैं। दिखने में भी आकर्षक लगती है। यह बटरफ्लाई पी के फूलों यानी अपराजिता के फूलों से तैयार की जाती है। आयुर्वेद में अपराजिता के फूलों का उपयोग डायबिटीज और कार्डियो वेस्कुलर डिजीज के इलाज में किया जाता है। महिलाओं को इस चाय का सेवन नियमित तौर पर नहीं करना चाहिए। उन्हें प्रसव के समय या पीरियड्स नियमित करने के लिए इस चाय का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

नीली चाय सुनकर आपको थोड़ी हैरत तो होगी, लेकिन इसके गुण भी बहुत हैं। दिखने में भी आकर्षक लगती है। यह बटरफ्लाई पी के फूलों यानी अपराजिता के फूलों से तैयार की जाती है। आयुर्वेद में अपराजिता के फूलों का उपयोग डायबिटीज और कार्डियो वेस्कुलर डिजीज के इलाज में किया जाता है। महिलाओं को इस चाय का सेवन नियमित तौर पर नहीं करना चाहिए। उन्हें प्रसव के समय या पीरियड्स नियमित करने के लिए इस चाय का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
ऐसे बनाएं : एक पैन में एक कप पानी लें और इसे उबालें। जब यह उबल जाए तो इसमें 4 से 5 बटरफ्लाइ पी के फूल डालें और इसे अच्छी तरह से उबलने दें। अब इस चाय में को प्याली में छान लें।
शुगर लेवल कंट्रोल : नीली चाय डायबिटीज में फायदेमंद है। इस चाय का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है।
डिटॉक्सीफिकेशन
यह शरीर को डिटॉक्स करती है। शरीर से अवांछित तत्त्वों को निकालकर इंटरनल क्लीनिंग करती है।
ये ध्यान रखें : यह चाय हर किसी के लिए नहीं है। आयुर्वेद में दो तरह की कल्पनाएं काम करती हैं आहार कल्पना और औषध कल्पना। औषध कल्पना वाली हब्र्स को आहार की तरह उपयोग नहीं कर सकते। इसे विशेषज्ञ की सलाह से लें।