
फैटी लिवर की दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- chatgtp)
Global Fatty Liver Day 2026: आज लाखों लोग ऐसे हैं जिन्हें फैटी लिवर का पता तब चलता है, जब वे किसी और वजह से जांच करवाने जाते हैं। यही कारण है कि डॉक्टर इसे अक्सर साइलेंट डिजीज कहते हैं। Global Fatty Liver Day 2026 के मौके पर यह समझना जरूरी है कि आखिर ऐसी कौन-सी बीमारी है जो शरीर में चुपचाप बढ़ती रहती है और कई बार सालों तक कोई बड़ा संकेत भी नहीं देती।
हमारा लिवर शरीर का एक बेहद मेहनती अंग है। यह भोजन को ऊर्जा में बदलने, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और शरीर के कई जरूरी कार्यों को संभालने का काम करता है। मेयो क्लिनिक, क्लीवलैंड क्लिनिक और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के अनुसार, जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है, तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है। समस्या तब शुरू होती है जब यह जमा चर्बी धीरे-धीरे लिवर के सामान्य कामकाज को प्रभावित करने लगती है।
फैटी लिवर की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इसके शुरुआती चरण में शरीर अक्सर कोई अलार्म नहीं बजाता। Mayo Clinic के अनुसार, लिवर में चर्बी जमा होने के बावजूद व्यक्ति सामान्य महसूस कर सकता है। वह रोज ऑफिस जा सकता है, जिम कर सकता है और अपनी सामान्य जिंदगी जी सकता है। यही वजह है कि अधिकांश लोगों को इसका पता किसी रूटीन हेल्थ चेकअप, अल्ट्रासाउंड या ब्लड टेस्ट के दौरान ही चलता है।
कुछ मामलों में शरीर छोटे-छोटे संकेत जरूर देता है, लेकिन लोग अक्सर उन्हें गंभीरता से नहीं लेते। Cleveland Clinic के अनुसार, इनमें शामिल हो सकते हैं:
ये लक्षण कई दूसरी वजहों से भी हो सकते हैं, इसलिए लोग इन्हें तनाव, कम नींद या व्यस्त जीवनशैली का नतीजा मान लेते हैं।
यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है कि फैटी लिवर सिर्फ शराब पीने वालों को होता है। NCBI और Cleveland Clinic के अनुसार, आज फैटी लिवर के कई मामले उन लोगों में भी देखे जा रहे हैं जो शराब नहीं पीते।
यानी आपकी रोजमर्रा की जीवनशैली भी लिवर की सेहत पर असर डाल सकती है।
कुछ लोगों में फैटी लिवर आगे चलकर लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस (Fibrosis), सिरोसिस (Cirrhosis) और गंभीर मामलों में लिवर फेलियर का कारण बन सकता है। हालांकि अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में इसकी पहचान हो जाए तो जीवनशैली में बदलाव करके स्थिति में सुधार किया जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
11 Jun 2026 05:10 pm
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