
फैटी लिवर- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Fatty Liver Symptoms In Eyes: आजकल हमारा खानपान और रहन-सहन ऐसा हो गया है कि भारत में हर 10 में से 4 व्यस्कों को फैटी लिवर की बीमारी हो रही है। 38.6% युवाओं में यह समस्या देखने को मिल रही है।
फैटी लिवर का मतलब है लिवर की कोशिकाओं (cells) में जरूरत से ज्यादा चर्बी या फैट का जमा हो जाना।
जर्नल ऑफ ट्रांसलेशन मेडिसिन के 2023 के एक अध्ययन में यह बात सामने आ चुकी है कि लिवर की खराबी के कुछ शुरुआती संकेत हमारी आंखों में दिखने लगते हैं। अगर इन साइलेंट लक्षणों को वक्त रहते पहचान लिया जाए, तो ग्रेड 1 फैटी लिवर को सही लाइफस्टाइल अपनाकर कम किया जा सकता है।
जब लिवर के सेल्स में एक्स्ट्रा फैट या चर्बी जमा हो जाती है, तो लिवर अपना काम ठीक से नहीं कर पाता। जब वह खून फिल्टर नहीं कर पाता, तो शरीर में बिलीरुबिन नाम का एक पीला वेस्ट बढ़ने लगता है। यही पीलापन हमारी आंखों के सफेद हिस्से में जमा हो जाता है, जिससे आंखें पीली दिखने लगती हैं। यह इस बात का बड़ा इशारा है कि लिवर खतरे में है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।
लिवर कमजोर होने से शरीर का केमिकल बैलेंस बिगड़ जाता है और अंदरूनी सूजन बढ़ती है। इसका सीधा असर आंखों की नमी पर पड़ता है। अगर लगातार सूखापन (ड्राईनेस), खुजली या जलन रहने लगे, तो समझ जाइए कि लिवर अंदर से सही तरह से काम नहीं कर रहा है।
जब लिवर पर एक्स्ट्रा लोड पड़ता है, तो शरीर के अंदर एक ऐसी थकान बैठ जाती है जो आराम करने से भी दूर नहीं होती। यह थकान सबसे पहले आंखों के आस-पास की स्किन पर दिखती है। अगर आप पूरी नींद ले रहे हैं, फिर भी आंखों के नीचे काले घेरे (डार्क सर्कल्स) बने हुए हैं और आंखें हमेशा थकी-थकी सी लगती हैं, तो यह लिवर की खराबी का संकेत हो सकता है।
लिवर की गड़बड़ी से हमारा मेटाबॉलिज्म (पचाने और एनर्जी बनाने का सिस्टम) धीमा हो जाता है। इस वजह से शरीर के अंगों में पानी या लिक्विड जमा होने लगता है। अगर सुबह उठने पर या दिनभर आपकी आंखों के नीचे का हिस्सा फूला हुआ या सूजा हुआ दिखाई दे, तो इसे हल्के में न लें। यह चेक करने के लिए कि कहीं फैटी लिवर तो नहीं है, डॉक्टर की सलाह पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) कराना चाहिए।
यह लक्षण बहुत कम लोगों में दिखता है, लेकिन यह गंभीर होता है। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज या मोटापा है, उनके लिए फैटी लिवर ज्यादा खतरनाक हो जाता है। लिवर में ज्यादा खराबी आने की वजह से कुछ मरीजों को धुंधला दिखने की समस्या भी हो सकती है। इसे पक्का करने का इकलौता तरीका मेडिकल टेस्ट ही है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
02 Jun 2026 03:21 pm
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