
पिंपल्स और ब्लड शुगर के संबंध को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- Chatgtp)
High Blood Sugar Symptoms: चेहरे पर निकलने वाले पिंपल्स (मुंहासे) को आमतौर पर लोग सिर्फ त्वचा (Skin) की समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। महंगे फेसवाश, क्रीम या घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस की हालिया रिसर्च एक अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर आपके पिंपल्स लंबे समय से ठीक नहीं हो रहे हैं, तो यह शरीर के अंदर बढ़ रहे ब्लड शुगर और इंसुलिन के असंतुलन का एक बड़ा संकेत हो सकता है।
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी और अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (ADA) की कई स्टडीज में पिंपल्स और हाई ब्लड शुगर के बीच एक सीधा और गहरा संबंध पाया गया है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance): जब हम बहुत ज्यादा मीठा या कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाते हैं, तो शरीर में ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है। इसे कंट्रोल करने के लिए शरीर में 'इंसुलिन' नाम का हार्मोन ज्यादा बनने लगता है।
सीबम का ज्यादा बनना: रिसर्च बताती है कि शरीर में बढ़ा हुआ इंसुलिन लेवल त्वचा के नीचे मौजूद सेबेशियस ग्लैंड्सको एक्टिव कर देता है। इससे त्वचा में जरूरत से ज्यादा तेल (Sebum) बनने लगता है, जो पोर्स को बंद कर देता है और पिंपल्स का कारण बनता है।
सूजन (Inflammation): हाई ब्लड शुगर के कारण शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन बढ़ती है, जिससे पिंपल्स लाल, दर्दनाक और जिद्दी रूप ले लेते हैं।
एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (हार्मोन और डायबिटीज विशेषज्ञ) डॉ. दीपक चंद गुप्ता बताते हैं, "हमारे पास ऐसे कई मरीज आते हैं जो महीनों से पिंपल्स का इलाज करा रहे होते हैं, लेकिन जब हम उनकी जांच करते हैं तो पता चलता है कि वे प्री-डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस के शिकार हैं। असल में, पिंपल्स त्वचा के रास्ते शरीर द्वारा दिया जाने वाला एक अलार्म है कि अंदर शुगर का सिस्टम बिगड़ रहा है।" इन पिंपल्स को पहचानने और इलाज के लिए नीचे दी गई बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
इसके लिए आप डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) जो बाहर से त्वचा के इन्फेक्शन और पिंपल्स को ठीक करने की दवा देंगे। साथ ही एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (हार्मोन विशेषज्ञ) जो ब्लड टेस्ट (जैसे Fasting Sugar, HbA1c और Insulin Level) करवाकर अंदरूनी गड़बड़ी को दवाओं और सही डाइट से ठीक करेंगे।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
2 Jun 2026, 12:58 PM IST
Published on:
2 Jun 2026, 12:58 PM IST
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