2 जून 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Weak Sense of Self: क्या आप भी दूसरों की बातों में जल्दी आ जाते हैं? मनोचिकित्सक से जानें इसके पीछे की वजह

Weak Sense of Self Cause Hindi : क्या आप भी किसी की भी बातों में बहुत जल्दी आ जाते हैं? मनोचिकित्सक से इसका कारण और बचने का उपाय समझिए।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Nidhi Yadav

Jun 02, 2026

mental health, weak sense of self, psychiatrist

मानसिक रूप से परेशान युवक- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Weak Sense of Self Cause: क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि कोई कुछ कहे और आप तुरंत उसकी बात मान लें? कई बार लोग दूसरों के बहकावे में आकर अपना बड़ा नुकसान कर बैठते हैं। मनोचिकित्सक डॉक्टर आदित्य सोनी (MD,Psychiatrist) बताते हैं कि जो लोग दूसरों की बातों में बहुत जल्दी आ जाते हैं, उनके अंदर खुद की पहचान (Weak Sense of Self) बहुत कमजोर होती है।

आइए, जानते हैं कि इस आदत के पीछे की वजह क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

दूसरों की बातों में आने का कारण क्या है?

मनोविज्ञान की दुनिया में खुद को अच्छे से समझने की ताकत को आत्मबोध कहते हैं। जिन लोगों को खुद की पहचान या पसंद-नापसंद को लेकर क्लेरिटी नहीं होती, वे दूसरों के असर में बहुत जल्दी आ जाते हैं। मनोचिकित्सक बताते हैं कि कमजोर आत्मबोध वाले लोगों का अपना कोई पक्का विचार नहीं होता। जब कोई दूसरा व्यक्ति उनके सामने पूरे भरोसे के साथ अपनी बात रखता है, तो वे बिना सोचे-समझे उसे सच मान लेते हैं। ऐसे लोगों को लगता है कि सामने वाला उनसे ज्यादा समझदार है, इसलिए वे अपनी सोच छोड़कर मानसिक रूप से दूसरों के पीछे चलने लगते हैं।

कमजोर आत्मबोध वाले लोगों के लक्षण

  • जो लोग दूसरों के बहकावे में आ जाते हैं।
  • अकेले में कोई भी फैसला लेने से डरते हैं।
  • हर छोटे काम के लिए दूसरों की सलाह चाहिए।
  • कोई उनकी बुराई कर दे, तो वे खुद को बदलने लगते हैं।
  • ऐसे लोगों में आत्मविश्वास की कमी होती है
  • ये लोग दूसरों को खुश करने में लगे रहते हैं।

बचपन के अनुभव और परवरिश का का संबंध

डॉक्टर का कहना है कि दूसरों की बातों में जल्दी आ जाने की यह आदत बचपन से भी जुड़ी हो सकती है। जिन बच्चों को बचपन में अपनी बात रखने की आजादी नहीं मिलती या जिनकी हर बात को दबा दिया जाता है, उनकी खुद की पहचान समय के साथ कमजोर हो जाती है। जब माता-पिता बच्चों के सारे फैसले खुद लेते हैं, तो बच्चे बड़े होकर भी दूसरों पर निर्भर रहने लगते हैं। वे खुद के फैसलों पर भरोसा करना सीख ही नहीं पाते, जिससे उनके दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि दूसरे लोग हमेशा सही होते हैं।

दूसरों की बातों में आने से बचने के लिए क्या करें?

अगर आपको भी लगता है कि आप दूसरों के बहकावे में जल्दी आ जाते हैं, तो आपको खुद पर भरोसा मजबूत करने की जरूरत है।

सबसे पहले, किसी की भी बात पर तुरंत हां बोलने या फैसला लेने से बचें। थोड़ा समय लें और खुद से पूछें कि क्या यह सही है? अपनी पसंद की एक लिस्ट बनाएं और उन पर टिके रहना सीखें।

छोटे-छोटे फैसले खुद लेना शुरू करें, जैसे कि आपको क्या पहनना है या क्या खाना है। जब आप खुद जिम्मेदारी उठाएंगे, तो आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आपके मानसिक स्वास्थ्य पर दूसरों का असर कम होने लगेगा।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।