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Summer Eye Care: धूप से बचने के लिए पहन रहे हैं सस्ता चश्मा? आई-स्पेशलिस्ट से जानिए कैसे यह आदत आंखों को कर सकती है डैमेज

Eye Health Tips: गर्मियों में सस्ते और बिना UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लास आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। जानें आई स्पेशलिस्ट डॉ. प्रदीप यादव की अहम सलाह।

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भारत

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Dimple Yadav

Jun 01, 2026

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आंखों के केयर की प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)

UV Protection Sunglasses: गर्मियों के मौसम में सूरज की तपिश और चिलचिलाती धूप से बचने के लिए लोग सनग्लासेस (धूप का चश्मा) का खूब इस्तेमाल करते हैं। अक्सर स्टाइलिश दिखने या पैसे बचाने के चक्कर में लोग सड़क किनारे या लोकल मार्केट से मिलने वाले सस्ते और घटिया क्वालिटी के चश्मे खरीद लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धूप से आंखों को बचाने वाला यही सस्ता चश्मा आपकी रोशनी का सबसे बड़ा दुश्मन बन सकता है?

आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर प्रदीप यादव के अनुसार, बिना यूवी प्रोटेक्शन वाले ये सस्ते चश्मे आंखों को आराम देने के बजाय उन्हें हमेशा के लिए डैमेज कर सकते हैं।

कैसे आंखों को नुकसान पहुंचाता है सस्ता चश्मा?

डॉ प्रदीप बताते हैं कि हमारी आंखों में एक नेचुरल डिफेंस सिस्टम (सुरक्षा तंत्र) होता है। जब हम तेज धूप में जाते हैं, तो हमारी आंखों की पुतलियां (Pupils) खुद-ब-खुद सिकुड़ जाती हैं, ताकि सूरज की हानिकारक किरणें आंखों के अंदर कम से कम जा सकें।

लेकिन जब आप किसी लोकल मार्केट से खरीदा हुआ सस्ता और डार्क लेंस वाला चश्मा पहनते हैं, तो आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है। इससे दिमाग को लगता है कि आप किसी अंधेरी जगह पर हैं और आंखों की पुतलियां सामान्य से अधिक फैल जाती हैं। सस्ते चश्मों के लेंस में अल्ट्रावॉयलेट (UV) किरणों को रोकने की क्षमता नहीं होती। नतीजतन, फैली हुई पुतलियों के रास्ते सूरज की खतरनाक यूवी किरणें (UVA और UVB) सीधे आंखों के पर्दे (Retina) तक बहुत आसानी से पहुंच जाती हैं। यह स्थिति बिना चश्मे के धूप में घूमने से भी ज्यादा खतरनाक होती है।

हो सकती हैं ये गंभीर बीमारियां

बिना यूवी कोटिंग वाले घटिया प्लास्टिक लेंस का लगातार इस्तेमाल करने से आंखों को कई तरह की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:

  • सूरज की हानिकारक किरणें जब सीधे आंखों के लेंस पर पड़ती हैं, तो समय से पहले मोतियाबिंद होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
  • मैकुलर डिग्रेडेशन की स्थिति आंखों के रेटिना को हमेशा के लिए डैमेज कर सकती है, जिससे आंखों की रोशनी धीरे-धीरे स्थायी रूप से कम होने लगती है।
  • फोटोकेराटाइटिस को आंखों का सनबर्न भी कहा जाता है। इसमें आंखों में तेज जलन, लालपन, पानी आना और चुभन की शिकायत हो जाती है।
  • सस्ते चश्मों के लेंस का ऑप्टिकल सेंटर सही नहीं होता, जिससे आंखों पर एक्स्ट्रा पावर का दबाव पड़ता है और लगातार सिरदर्द की समस्या बनी रहती है।

चश्मा चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

गर्मियों में अपनी आंखों को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर प्रदीप यादव ने कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं:

  • हमेशा ऐसा सनग्लास खरीदें जिस पर स्पष्ट रूप से UV 400 या 100% UV Protection लिखा हो। यह लेंस सूरज की 99 से 100 फीसदी हानिकारक किरणों को ब्लॉक कर देता है।
  • अगर आपका धूप में आने-जाने या ड्राइविंग का काम ज्यादा है, तो पोलेराइज्ड लेंस वाले चश्मे चुनें। ये सड़कों या गाड़ियों से आने वाली तेज चमक (Glare) को रोकते हैं।
  • चश्मा हमेशा किसी रजिस्टर्ड ऑप्टिकल स्टोर या भरोसेमंद ब्रांड से ही लें। सड़क किनारे मिलने वाले फैशनेबल लेकिन सस्ते चश्मों को खरीदने से पूरी तरह बचें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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