
हार्ट बायपास सर्जरी को र्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)
Coronary Artery Bypass Grafting: दिल की बीमारियां आज दुनिया भर में मौत के सबसे बड़े कारणों में से एक हैं। कई बार दिल की धमनियों (Coronary Arteries) में इतनी ज्यादा रुकावट आ जाती है कि दवाइयों या स्टेंट से इलाज संभव नहीं रह जाता। ऐसी स्थिति में डॉक्टर हार्ट बायपास सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। इस सर्जरी को मेडिकल भाषा में Coronary Artery Bypass Grafting (CABG) कहा जाता है।
NIH और Mayo Clinic के अनुसार, बायपास सर्जरी का मकसद बंद या संकरी हो चुकी धमनियों के आसपास खून के लिए नया रास्ता बनाना होता है, जिससे दिल की मांसपेशियों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण पहुंच सके।
जब दिल की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल और फैट जमा होकर ब्लॉकेज पैदा कर देते हैं, तो दिल तक खून का प्रवाह कम हो जाता है। इससे सीने में दर्द (एंजाइना), सांस फूलना और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। बायपास सर्जरी में सर्जन शरीर के किसी दूसरे हिस्से से एक स्वस्थ रक्तवाहिनी (आमतौर पर छाती की धमनी या पैर की नस) निकालकर उसे ब्लॉकेज वाली धमनी के आगे जोड़ देते हैं। इससे खून को नया रास्ता मिल जाता है और दिल तक रक्त प्रवाह बेहतर हो जाता है।
Mayo Clinic के अनुसार डॉक्टर निम्न परिस्थितियों में बायपास सर्जरी की सलाह दे सकते हैं:
यह एक बड़ी सर्जरी होती है और आमतौर पर 3 से 6 घंटे तक चल सकती है। पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है ताकि उसे दर्द महसूस न हो। सर्जरी के मुख्य चरण:
सर्जन सीने की हड्डी के बीच में चीरा लगाकर दिल तक पहुंचते हैं।
अक्सर छाती की आंतरिक धमनी (Internal Mammary Artery) या पैर की नस (Saphenous Vein) का उपयोग किया जाता है।
इस रक्तवाहिनी को ब्लॉकेज वाली धमनी के आगे जोड़ दिया जाता है, जिससे खून अवरुद्ध हिस्से को बायपास करके आगे पहुंच सके।
सर्जरी पूरी होने के बाद दिल को सामान्य रूप से काम करने दिया जाता है और सीने की हड्डी को तारों की मदद से बंद कर दिया जाता है।
हर बड़ी सर्जरी की तरह इसमें भी कुछ जोखिम होते हैं। Mayo Clinic के अनुसार इसमें ब्लीडिंग, संक्रमण, अनियमित धड़कन (Arrhythmia), स्ट्रोक, किडनी संबंधी समस्याएं, हार्ट अटैक, अस्थायी याददाश्त या सोचने में परेशानी हो सकती है। हालांकि अनुभवी सर्जिकल टीम और सही देखभाल से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अधिकांश मरीज लगभग एक सप्ताह के भीतर अस्पताल से घर जा सकते हैं। पूरी तरह ठीक होने में 6 से 12 सप्ताह तक का समय लग सकता है। इस दौरान डॉक्टर कार्डियक रिहैबिलिटेशन, हल्की एक्सरसाइज, संतुलित आहार और नियमित दवाएं लेने की सलाह देते हैं।
बायपास सर्जरी ब्लॉकेज का नया रास्ता बनाती है, लेकिन बीमारी की जड़ यानी एथेरोस्क्लेरोसिस को खत्म नहीं करती। इसलिए सर्जरी के बाद भी धूम्रपान छोड़ना, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना बेहद जरूरी है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
12 Jun 2026 10:55 am
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