Fatigue, irritability and anger cause burn out syndrome -थकान के साथ तनाव और उदासी सा महसूस हो रहा है तो आपको इससे निकलने के लिए प्रयास शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि आपकी ये हालत बर्न आउट सिंड्रोम में बदल सकती है। ये एक ऐसी गंभीर स्थिति है जो आपकी कार्यक्षमता ही नहीं पर्सनल रिलेशन भी बिगाड़ सकती है। तो चलिए जानें कि ये बीमारी क्या है, क्यों होती है और इससे बचने के उपाय क्या हैं।

थकान कई बार शारीरिक के साथ मानसिक भी होती है। जब दोनों ही स्तर की थकान बढ़ने लगती है तब गुस्सा, चिड़चिड़ापन और उदासी अपने आप ही छाने लगती है। व्यवहार में अचानक से बदालव अगर आपको नजर आने लगे तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए, क्योंकि ये दशा आपको सिंड्रोम का शिकार बना रही होती है। यह एक ऐसी मनोवैज्ञानिक समस्या का लक्षण होता है, जिसे लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये सही तरीका नहीं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे तनाव की वजह से पैदा होने वाली मनोवैज्ञानिक समस्या माना है और इसे बर्न आउट सिंड्रोम का नाम दिया गया है। यह मर्ज तीन स्तरों पर व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करता है- अत्यधिक थकान, काम से ऊबना, कार्यक्षमता और आत्मविश्वास में कमी के कारण ऑफिस में कमजोर परफॉर्मेंस आदि। इन बातों का लोगों के निजी और प्रोफेशनल लाइफ पर बुरा असर पड़ता है।
बर्न आउट सिंड्रोम का कारण
बर्न आउट सिंड्रोम से कैसे करें बचाव
(डिस्क्लेमर: आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए दिए गए हैं और इसे आजमाने से पहले किसी पेशेवर चिकित्सक सलाह जरूर लें। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने, एक्सरसाइज करने या डाइट में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)