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Jaspal Rana Heart Attack: स्टेंट लगने के बाद भी क्यों बना रहता है मौत का खतरा? NLM के हवाले से जानिए

Jaspal Rana Dies at 49: जसपाल राणा के निधन के बाद हार्ट अटैक रिकवरी पर चर्चा तेज है। जानिए क्यों स्टेंट लगने के बाद भी पहले 30 दिनों तक अचानक मौत, हार्ट फेलियर और कार्डियक जटिलताओं का खतरा बना रहता है।

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भारत

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Dimple Yadav

Jun 12, 2026

Jaspal Rana Heart AttackHealth News Heart Health Cardiology

जसपाल राणा की फोटो मनु भाकर के साथ (photo- insta @jaspal_rana_2806)

Jaspal Rana Death: भारतीय शूटिंग के दिग्गज खिलाड़ी और कोच जसपाल राणा (Jaspal Rana) की 49 साल में हार्ट अटैक से मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग की गई। हालत में सुधार भी दिख रहा था और उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने की तैयारी चल रही थी, लेकिन इसी दौरान एक गंभीर कार्डियक जटिलता ने उनकी जान ले ली।

यह घटना कई लोगों के मन में एक सवाल छोड़ गई है, अगर ब्लॉकेज खोल दिया गया था और स्टेंट भी लग गया था, तो फिर खतरा क्यों बना रहा?

स्टेंट नस खोल सकता है, लेकिन दिल को हुए नुकसान को तुरंत नहीं

हार्ट अटैक तब होता है जब दिल की किसी धमनी में अचानक रुकावट आ जाती है और दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचना बंद हो जाता है। एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग का मकसद उस बंद रास्ते को फिर से खोलना होता है। अगर मरीज देर से अस्पताल पहुंचता है, तो तब तक दिल की मांसपेशियों को काफी नुकसान हो चुका होता है। नस खुल जाने के बावजूद दिल पहले जैसी ताकत से काम नहीं कर पाता। यही वजह है कि कई मरीजों में हार्ट फेलियर या दिल की पंपिंग क्षमता कम होने की समस्या विकसित हो जाती है।

रिसर्च क्या कहती है?

Harvard Medical School में प्रकाशित VALIANT ट्रायल के विश्लेषण के अनुसार, हार्ट अटैक के बाद अचानक हृदय मृत्यु (Sudden Cardiac Death) का खतरा सबसे ज्यादा पहले 30 दिनों में होता है। जिन मरीजों की दिल की पंपिंग क्षमता कमजोर होती है, उनमें यह जोखिम और बढ़ जाता है।

वहीं, नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित शोध बताता है कि हार्ट अटैक के बाद विकसित होने वाला हार्ट फेलियर अचानक मौत के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है।

इसके अलावा, PubMed Central में प्रकाशित समीक्षा के अनुसार, हार्ट अटैक के बाद शुरुआती कुछ हफ्तों में जानलेवा अनियमित धड़कन, नए ब्लॉकेज और दिल की कार्यक्षमता में गिरावट जैसी जटिलताओं का खतरा बना रहता है।

हार्ट अटैक के बाद क्यों बढ़ जाता है अचानक मौत का जोखिम?

जब दिल की मांसपेशियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो उसका असर सिर्फ खून पंप करने की क्षमता पर नहीं पड़ता। इससे दिल की विद्युत प्रणाली भी प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, जिसे अतालता (Arrhythmia) कहा जाता है। गंभीर मामलों में यही समस्या अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती है।

स्टेंट लगने के बाद भी क्यों जरूरी हैं दवाएं?

कई मरीज स्टेंट लगने के बाद खुद को पूरी तरह सुरक्षित मान लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान दवाओं को नियमित रूप से लेना बेहद जरूरी होता है। खासकर ब्लड थिनर दवाएं बंद करने या भूलने से स्टेंट के भीतर खून का थक्का बनने का खतरा बढ़ सकता है। इसे स्टेंट थ्रॉम्बोसिस कहा जाता है, जो दोबारा हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

हार्ट अटैक के बाद यदि मरीज को ये लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

  • सीने में दर्द या दबाव
  • सांस फूलना
  • अचानक कमजोरी
  • तेज या अनियमित धड़कन
  • चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।