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Gastroschisis Disease In Babies: मुरादाबाद के डॉक्टरों ने बचाया 1.8 किलो का मासूम, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए क्या है यह दुर्लभ बीमारी गैस्ट्रोस्किसिस

Gastroschisis Disease In Babies Cause: क्या जन्म के समय बच्चे के अंग पेट के बाहर निकल सकते हैं? क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, यह बेहद दुर्लभ बीमारी गैस्ट्रोस्किसिस (Gastroschisis) है। जानिए आखिर क्यों होती है यह जन्मजात बीमारी और कैसे मुरादाबाद में सामने आए ऐसे ही एक मामले में डॉक्टरों ने 94 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद एक मासूम को नया जीवन दिया।
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भारत

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Nidhi Yadav

Jul 27, 2026

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दुर्लभ बीमारी गैस्ट्रोस्किसिस में जन्म के समय बच्चे के अंग पेट के बाहर निकल सकते हैं- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Gastroschisis Disease In Babies Hindi: एक मां के लिए बच्चे के जन्म की घड़ी जीवन की सबसे बड़ी खुशी लेकर आती है। लेकिन कल्पना कीजिए उस पल की, जब एक नवजात दुनिया में कदम रखे और उसकी आंतें या पेट के अंग शरीर के बाहर लटक रहे हों। सुनने में ही रूह कंपा देने वाली यह स्थिति कोई काल्पनिक कहानी नहीं, बल्कि एक बेहद दुर्लभ जन्मजात बीमारी है जिसे मेडिकल साइंस में गैस्ट्रोस्किसिस (Gastroschisis) कहा जाता है।

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरी दुनिया में औसतन 2,500 से 3,000 बच्चों में से किसी एक बच्चे को यह बीमारी होती है। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic), स्वास्थ्य रिपोर्टों और हाल ही में मुरादाबाद में सामने आए एक चमत्कारी मामले के आधार पर समझते हैं कि यह दुर्लभ बीमारी क्या है, यह क्यों होती है और कैसे डॉक्टरों ने 94 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद एक मासूम को नया जीवन दिया।

क्या है ये पूरा मामला?

बेंगलुरु के रहने वाले सलादुद्दीन अकील की पत्नी शादमीन ने डिलीवरी के लिए मुरादाबाद स्थित मायके में एक बच्चे को जन्म दिया। जब नवजात (यूसुफ) पैदा हुआ, तो उसकी आंतें पेट से बाहर थीं और इंफेक्शन की वजह से सूजकर बहुत खराब स्थिति में थीं। बच्चे का वजन भी महज 1.8 किलोग्राम था। कायरान अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. वाईके पूनिया और उनकी टीम के सामने बच्चे की जान बचाना एक नामुमकिन सी चुनौती थी। डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी करके आंतों को पेट के अंदर तो किया, लेकिन सूजन इतनी ज्यादा थी कि पेट में जगह बहुत कम बची थी और फेफड़ों पर दबाव पड़ रहा था। बच्चा मुंह या पेट से दूध नहीं पचा सकता था। इसलिए नसों के जरिए उसे टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन (TPN) देकर जिंदा रखा गया। बंद आंतों को खोलने (Atresia) के लिए 35वें दिन दूसरा ऑपरेशन किया गया। इसके बाद भी लगातार निगरानी रखी गई और जन्म के 94 दिन बाद तीसरा सफल ऑपरेशन किया गया।

क्या होती है गैस्ट्रोस्किसिस बीमारी?

गैस्ट्रोस्किसिस एक ऐसी जन्मजात समस्या (Birth Defect) है, जिसमें गर्भ में बच्चे का विकास होते समय उसके पेट की बाहरी दीवार (मांसपेशियां और त्वचा) पूरी तरह से बंद नहीं हो पाती। आमतौर पर नाभि (Belly Button) के ठीक बगल में एक छोटा सा छेद रह जाता है। इस छेद के जरिए बच्चे की आंतें (और कभी-कभी पेट या लिवर जैसे अन्य अंग) शरीर से बाहर निकल आती हैं। चूंकि ये अंग मां के पेट के अंदर एमनियोटिक द्रव (Amniotic Fluid) में खुले में तैरते रहते हैं, इसलिए इनमें सूजन, मरोड़ या इंफेक्शन होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है।

क्या गर्भावस्था में इसकी पहचान हो सकती है?

हां, आधुनिक मेडिकल साइंस की मदद से गर्भावस्था के दौरान ही इसका पता लगाया जा सकता है, प्रेग्नेंसी के 18वें से 20वें हफ्ते के दौरान होने वाले रूटीन अल्ट्रासाउंड में यह साफ दिख जाता है कि बच्चे के अंग बाहर हैं या नहीं। मां के ब्लड टेस्ट (AFP टेस्ट) से भी इसके शुरुआती संकेत मिल जाते हैं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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