
ब्रेन स्ट्रोक को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)
Brain Stroke Symptoms: जब किसी व्यक्ति को अचानक बोलने में दिक्कत होने लगे, चेहरा टेढ़ा दिखाई दे या शरीर का एक हिस्सा काम करना बंद कर दे, तो यह ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। भारत में हर साल लाखों लोग स्ट्रोक का शिकार होते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोगों को यह भी नहीं पता होता कि स्ट्रोक सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई प्रकार का होता है।
NIH (National Institute of Neurological Disorders and Stroke), Mayo Clinic और American Stroke Association के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं, इस्केमिक स्ट्रोक, हेमोरेजिक स्ट्रोक और ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) यानी मिनी स्ट्रोक।
लगभग 85% स्ट्रोक इस्केमिक स्ट्रोक होते हैं। यह तब होता है जब दिमाग तक खून पहुंचाने वाली किसी नस में खून का थक्का या फैट जमा होकर रुकावट पैदा कर देता है। जब रक्त प्रवाह रुक जाता है, तो दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे मरने लगती हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और दिल की कुछ बीमारियां इसके प्रमुख जोखिम कारक माने जाते हैं।
हेमोरेजिक स्ट्रोक इस्केमिक स्ट्रोक से कम आम है, लेकिन अक्सर ज्यादा गंभीर माना जाता है। यह तब होता है जब मस्तिष्क के भीतर या उसके आसपास कोई रक्त वाहिका फट जाती है और खून बहने लगता है। Mayo Clinic के अनुसार, लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर इस प्रकार के स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। इसके अलावा एन्यूरिज्म (Aneurysm), सिर की गंभीर चोट और कुछ रक्त संबंधी विकार भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं। इसमें मरीज को अचानक बहुत तेज सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी या दौरे पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
मिनी स्ट्रोक को मेडिकल भाषा में Transient Ischemic Attack (TIA) कहा जाता है। इसमें दिमाग तक खून का प्रवाह थोड़े समय के लिए रुकता है, लेकिन कुछ मिनटों या घंटों में सामान्य हो जाता है। यही वजह है कि इसके लक्षण भी कुछ समय बाद गायब हो सकते हैं। लेकिन American Stroke Association चेतावनी देती है कि मिनी स्ट्रोक को हल्के में लेना बड़ी गलती हो सकती है, क्योंकि यह भविष्य में आने वाले बड़े स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
इस्केमिक स्ट्रोक में नस ब्लॉक होती है, हेमोरेजिक स्ट्रोक में नस फट जाती है, जबकि मिनी स्ट्रोक में ब्लॉकेज अस्थायी होता है और लक्षण कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो सकते हैं। हालांकि तीनों स्थितियों में एक बात समान है, समय पर इलाज न मिलने पर दिमाग को गंभीर नुकसान हो सकता है।
स्ट्रोक के इलाज में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, मरीज के ठीक होने की संभावना उतनी बेहतर होगी।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
12 Jun 2026 04:25 pm
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