Cancer Cause: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर एजेंसी ने हाल ही में एक चेतावनी दी है कि नाइट शिफ्ट के दौरान आप जो देर रात तक जागकर काम करते हैं, यह आपको कैंसर का शिकार बना सकता है। आइए जानते हैं कि कैसे नाइट शिफ्ट से कैंसर का खतरा बढ़ता है, कौन से कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है और इससे बचने के लिए क्या करें?
Cancer Cause Night Shift: कैंसर का नाम आते ही हमारे जेहन में एक अजीब सा डर बैठ जाता है। अब इतनी खतरनाक बीमारी से सबको ही डर लगेगा, यह तो जाहिर सी बात है। कैंसर के कारणों में अगर हम देखें, तो सबसे पहला कारक हम खुद ही होते हैं क्योंकि हम लोग जिस तरीके से अपनी जीवनशैली जी रहे हैं, ऐसे में कैंसर का बढ़ना सीधी सी बात है। ऐसी ही एक चेतावनी WHO ने अभी दी है कि जो लोग नाइट-शिफ्ट में नियमित रूप से काम कर रहे हैं या बहुत लंबे समय से देर रात तक जागकर काम करते हैं, उनमें कैंसर होने का खतरा रात में सोने वालों की तुलना में कई गुना ज्यादा होता है।
आज के समय में कैंसर और नाइट शिफ्ट में काम करने के संबंध को जानना हमारे लिए बहुत जरूरी है। हम जिस पश्चिमी संस्कृति की नकल करके अपनी जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत को बदल चुके हैं, वही सबसे बड़ा कारण है कि हम खुद को कैंसर का शिकार बनाने पर तुले हुए हैं। आइए जानते हैं कि रात को देर तक जागने से कैसे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है और इसके कारण हमें कौन से कैंसर होने का खतरा ज्यादा रहता है। इस कैंसर जैसी विपदा से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए?
कैंसर पर हुए कई शोधों में यह बात सामने आई है कि यदि आप रात को देर तक जागते हैं, तो आपको कैंसर होने का खतरा बाकी लोगों की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है। हम जो ज्यादा उजाले में रहते हैं, यही उजाला हमारे जीवन में अंधेरा ला देता है। इसके कई मुख्य कारण निम्न हैं:
1. नींद का हार्मोन (मेलानटोनिन - Melatonin) अंधेरे में सोने से बनता है और कैंसर कोशिकाओं के बनने को रोकता है। रोशनी में जागने से यह बनना बंद हो जाता है।
2. बॉडी क्लॉक (Circadian Rhythm) बिगड़ना - हमारे शरीर की जो प्राकृतिक घड़ी होती है, रात में देर तक जागने से उसकी लय बिगड़ जाती है। इससे DNA खराब होता है और यही खराब DNA फिर कैंसर कोशिकाओं को बनाता है।
3. इम्यून सिस्टम कमजोर होना - रात में जागने से शरीर की 'नेचुरल किलर सेल्स' में कमी आ जाती है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने में सहायता मिलती है।
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।