
Enteromix Cancer Vaccine (photo- gemini ai)
Enteromix Cancer Vaccine: रूस ने हाल ही में एक नए एक्सपेरिमेंटल कैंसर वैक्सीन Enteromix को लेकर बड़ा दावा किया है। कहा जा रहा है कि यह वैक्सीन शरीर की इम्यून सिस्टम को ट्रेन करके कैंसर सेल्स को पहचानने और खत्म करने में मदद कर सकती है। इस खबर के सामने आते ही लोगों में काफी उत्साह और उम्मीद दोनों बढ़ गई हैं। लेकिन क्या यह सच में कैंसर का इलाज बन सकता है? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
Russia के वैज्ञानिकों ने इस वैक्सीन को एक नई तरह की इम्यूनोथेरेपी बताया है। आम वैक्सीन जैसे खसरा या पोलियो से बचाने के लिए होते हैं, लेकिन कैंसर वैक्सीन अलग तरह से काम करते हैं। ये बीमारी को रोकने के बजाय शरीर की इम्यून सिस्टम को कैंसर सेल्स पहचानने और उन पर हमला करने के लिए तैयार करते हैं। Enteromix को भी इसी तरह का थेराप्यूटिक वैक्सीन कहा जा रहा है, यानी यह उन लोगों को दिया जाता है जिन्हें पहले से कैंसर है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि इस वैक्सीन से इलाज कराने वाले 48 मरीजों के शरीर में “जीरो कैंसर सेल्स” रह गए। यह खबर बहुत तेजी से वायरल हो गई। लेकिन अभी तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक डेटा सामने नहीं आया है जिसे दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने स्वतंत्र रूप से जांचा हो। यानी यह दावा अभी साबित नहीं हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक Enteromix अभी शुरुआती क्लिनिकल ट्रायल (Phase I) में है। इस स्टेज में मुख्य रूप से यह देखा जाता है कि दवा सुरक्षित है या नहीं और शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है। इस चरण में यह साबित नहीं किया जाता कि इलाज पूरी तरह काम करता है या बीमारी खत्म कर देता है। इसके लिए आगे Phase II और Phase III जैसे बड़े ट्रायल जरूरी होते हैं, जिनमें ज्यादा मरीज शामिल होते हैं और लंबे समय तक परिणाम देखे जाते हैं।
अब तक किसी बड़ी वैश्विक हेल्थ एजेंसी ने इसे कैंसर का इलाज मानकर मंजूरी नहीं दी है। यहां तक कि World Health Organisation ने भी इन दावों की पुष्टि नहीं की है।
मेडिकल साइंस में कई बार शुरुआती नतीजे अच्छे दिखते हैं, लेकिन बाद के ट्रायल में दवा उतनी प्रभावी साबित नहीं होती। इसलिए एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक पूरी रिसर्च और लंबे समय का डेटा सामने नहीं आता, तब तक इसे पक्का इलाज नहीं माना जा सकता।
Enteromix एक उम्मीद जरूर है, लेकिन अभी सिर्फ रिसर्च स्टेज में है। इसे कैंसर का पक्का इलाज कहना जल्दबाजी होगी। वैज्ञानिकों को अभी और परीक्षण करने होंगे, तभी साफ होगा कि यह सच में कितना असरदार है।
Published on:
27 Feb 2026 04:48 pm
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