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Cancer Vaccine: कैंसर के मरीजों के लिए खुशखबरी! वैज्ञानिकों ने तैयार की हर ट्यूमर के लिए अलग वैक्सीन

Cancer Vaccine: नई रिसर्च बताती है कि पर्सनलाइज्ड कैंसर वैक्सीन और इम्यूनोथेरेपी मिलकर इलाज को ज्यादा असरदार बना सकती हैं। जानें पूरी जानकारी।

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भारत

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Dimple Yadav

Jan 23, 2026

Cancer Vaccine

Cancer Vaccine (photo- gemini ai)

Cancer Vaccine: भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इलाज की बढ़ती लागत लोगों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। इसी बीच माउंट साइनाई के आइकान स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों की एक नई समीक्षा बताती है कि कैंसर वैक्सीन पर सालों से चल रहा रिसर्च अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। यह समीक्षा Cell Reports Medicine जर्नल में प्रकाशित हुई है और इसमें बताया गया है कि आधुनिक तकनीक के कारण कैंसर वैक्सीन अब पहले से ज्यादा सटीक, व्यक्तिगत और असरदार बनती जा रही हैं।

पहले क्यों नहीं सफल हो पाईं कैंसर वैक्सीन?

शुरुआती दौर में कैंसर वैक्सीन से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन जब इन्हें अकेले इलाज के तौर पर दिया गया तो खास सफलता नहीं मिली। इसकी बड़ी वजह थी ट्यूमर के अंदर मौजूद इम्यून दबाव और सही एंटीजन का चुनाव न हो पाना। कैंसर कोशिकाएं शरीर की इम्यून सिस्टम से खुद को छुपा लेती थीं, जिससे वैक्सीन बेअसर हो जाती थी।

नई तकनीक से बदली तस्वीर

आज स्थिति अलग है। ट्यूमर सीक्वेंसिंग और जेनेटिक जांच की मदद से वैज्ञानिक अब यह समझ पा रहे हैं कि हर मरीज के कैंसर में कौन-से खास जेनेटिक बदलाव हैं। इन्हीं बदलावों के आधार पर नियोएंटीजन आधारित वैक्सीन बनाई जाती है, जो पूरी तरह मरीज के कैंसर के अनुसार तैयार होती है। सरल शब्दों में कहें तो यह वैक्सीन शरीर की इम्यून सिस्टम को बिल्कुल सही निशाना दिखाती है, ताकि T-cells कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर खत्म कर सकें।

किन कैंसर में दिखे अच्छे नतीजे?

रिव्यू में शामिल क्लिनिकल ट्रायल्स बताते हैं कि ये वैक्सीन सुरक्षित हैं और मजबूत इम्यून प्रतिक्रिया पैदा करती हैं। मेलानोमा, पैंक्रियाटिक कैंसर, ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन कैंसर), फेफड़ों और ब्लैडर कैंसर जैसे कई कैंसर में इसके अच्छे संकेत मिले हैं। ये वैक्सीन पेप्टाइड, DNA या mRNA के रूप में दी जा रही हैं, और शरीर की सुरक्षा प्रणाली को ज्यादा सक्रिय बना रही हैं।

कॉम्बिनेशन थेरेपी से बढ़ी उम्मीद

वैज्ञानिकों का मानना है कि कैंसर वैक्सीन अकेले नहीं, बल्कि इम्यून चेकपॉइंट इनहिबिटर्स और दूसरे स्टैंडर्ड इलाज के साथ मिलकर ज्यादा असर दिखा सकती हैं। इस तरह का इलाज कैंसर की इम्यून रुकावट को तोड़ने में मदद करता है और मरीज के नतीजे बेहतर हो सकते हैं।

अब भी क्या हैं चुनौतियां?

हर मरीज के लिए अलग वैक्सीन बनाना समय और खर्च दोनों के लिहाज से चुनौती है। इसके अलावा अभी ऐसे पक्के बायोमार्कर की कमी है, जिससे यह पहले ही पता चल सके कि किस मरीज को सबसे ज्यादा फायदा होगा।

आगे का रास्ता क्या है?

वैज्ञानिक अब ऑफ-द-शेल्फ नियोएंटीजन वैक्सीन और बेहतर डिलीवरी सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जिससे इलाज ज्यादा लोगों तक पहुंचे। बड़े और लंबे क्लिनिकल ट्रायल आने वाले समय में यह तय करेंगे कि कैंसर वैक्सीन कैसे स्टैंडर्ड इलाज का हिस्सा बन सकती हैं। कुल मिलाकर, यह रिसर्च दिखाती है कि कैंसर वैक्सीन अब सिर्फ कल्पना नहीं, बल्कि इलाज का मजबूत विकल्प बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।