
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के करीब 30 फीसदी यूजर्स 16 साल की उम्र के हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के दिमाग पर वयस्कों के मुकाबले मोबाइल फोन का ज्यादा असर होता है।
जानिए, क्या कहते हैं एक्सपर्ट
बाल रोग विशेषज्ञों को कहना है कि माता-पिता को बच्चों को मोबाइल फोन से दूर ही रखना चाहिए। दो साल की उम्र से लेकर आठ साल तक के बच्चों की कोशिकाओं का तेजी से विकास होता है लेकिन मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडिएशन से उनका विकास अवरुद्ध हो सकता है और कई मामलों में स्थिति गंभीर होने पर कैंसर या सीखने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
कहीं आप ही जिम्मेदार तो नहीं
आजकल ज्यादातर बच्चे मम्मी-पापा के मोबाइल फोन में गेम्स खेलते रहते हैं। इस दौरान वह गेम के कैरेक्टर से खुद को जोड़कर आक्रामक व्यवहार करने लगते हैं। धीरे-धीरे वे हर बात पर चिड़चिड़े हो जाते हैं, साथी दोस्तों से भी उनकी नहीं बनती और वे टीचर के साथ भी दुव्र्यवहार करते हैं। इसलिए माता-पिता बच्चे को मोबाइल फोन देने की बजाय उन्हें आउटडोर गेम्स जैसे फुटबॉल, बैडमिंटन आदि खेलने के लिए कहें ताकि उनका शारीरिक व मानसिक विकास हो सके।