निमोनिया कई लोगों को बचपन से होता है। तो कितनों को बड़े होने के बाद हो जाता है । इसके लक्षण बहुत ही आम होते हैं परंतु इससे इंसान के अंदर काफी ज्यादा कमजोरी आ जाती हैं । आज के इस आर्टिकल में हम आपको निमोनिया के कारण और उसके उपचार के विषय में जानकारी देने जा रहे हैं।
नई दिल्ली। निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। यह मुख्य रूप से विषाणु या जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है। यह बैक्टीरिया, वायरस अथवा पेरासाइट्स के कारण भी हो सकता है। इसके अलावा निमोनिया सूक्ष्म जीव, कुछ दवाओं, और अन्य रोगों के संक्रमण से भी हो सकता है।
लक्षण
निमोनिया होने पर फ्लू जैसे लक्षण महसूस होते हैं। ये लक्षण धीरे-धीरे या फिर तेजी से विकसित हो सकते हैं। निमोनिया का मुख्य लक्षण खाँसी है। रोगी कमजोर और थका हुआ महसूस करता है।बलगम वाली खाँसी से ग्रस्त होना। रोगी को बुखार के साथ पसीना और कंपकंपी भी हो सकती है।
रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है, या फिर वो तेजी से सांस लेने लगता है।
सीने में दर्द होना।
मुख्य कारण
वायरस, बैक्टीरिया, फंगस या अन्य जीवों से निमोनिया हो सकता है।
कई प्रकार के जीवाणुओं से निमोनिया हो सकता है। दातर मामलों में निमोनिया करने वाले जीव (बैक्टीरिया या वायरस) का पता परीक्षण से भी नहीं लग पाता।
लहसून का उपयोग
एक कप दूध में चार कप पानी डालें। इसमें आधा चम्मच लहसुन डालकर उबाल लें। उबलने के बाद जब यह चौथाई (¼) रह जाए तो दिन में दो बार सेवन करें।
भाप लेना है कारगर
भाप लेने से संक्रमण में कमी आती है। इससे रोगी की सांस लेने की क्षमता भी बेहतर होती है। भाप से खांसी कम होती है, और छाती की जकड़न भी दूर हो जाती है।
सरसों का तेल
सरसों के गुनगुने तेल में हल्दी का पाउडर मिलाएं। इससे अपनी छाती पर मसाज करें। इससे निमोनिया से बचाव होता है। यह लाभ पहुंचाता है।