
प्रेग्नेंसी में सिरदर्द से परेशान महिला की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)
Pregnancy Headache Signs: गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं। ऐसे में सिरदर्द, जी मिचलाना या थकान होना बेहद आम माना जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाले हर सिरदर्द को सामान्य कमजोरी या माइग्रेन समझकर टालना भारी पड़ सकता है। यह दिमाग से जुड़ी किसी बड़ी बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (Obstetrics & Gynecology) डॉ. शैलजा अग्रवाल से समझते हैं कि प्रेग्नेंसी में सिरदर्द कब किसी गंभीर बीमारी का इशारा होता है और महिलाओं को कब तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
डॉ. शैलजा बताती हैं कि, "गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे हल्का सिरदर्द होना आम है। लेकिन अगर किसी महिला को ऐसा सिरदर्द हो रहा है जो दवा खाने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा और लगातार बढ़ता जा रहा है, तो यह दिमाग से जुड़ी किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या या ट्यूमर का संकेत हो सकता है।"
आंखों की रोशनी पर असर पड़ना: अगर सिर के दर्द के साथ-साथ आपको चीजें धुंधली दिखाई दे रही हैं, एक की जगह दो चीजें (Double Vision) दिख रही हैं या साइड का देखने में परेशानी हो रही है, तो यह साफ इशारा है कि दिमाग के अंदर कोई गांठ आंखों की नस को दबा रही है।
तेज रफ्तार से अचानक उल्टी होना (Projectile Vomiting): प्रेग्नेंसी के शुरुआती हफ्तों में जी मिचलाना और नॉर्मल उल्टी होना आम है। लेकिन अगर बिना जी मिचलाए अचानक बहुत तेजी से उछलकर उल्टी आए, तो यह दिमाग के भीतर बढ़ते दबाव का लक्षण हो सकता है।
तेज दर्द के कारण नींद न आना: यदि सिरदर्द इतना गंभीर है कि रात को आपकी नींद टूट जाती है या कोई भी पेनकिलर उस पर असर नहीं कर रही है, तो इसे बिल्कुल भी मामूली माइग्रेन न समझें।
चक्कर आना या बेहोशी: सिरदर्द के साथ अचानक से शरीर का कोई हिस्सा सुन्न पड़ जाना, चक्कर खाकर गिरना या अत्यधिक कमजोरी महसूस होना बेहद संवेदनशील लक्षण हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक 29 साल की महिला, जो 14 हफ्ते (दूसरी तिमाही) की गर्भवती थी, अचानक तेज सिरदर्द, लगातार उल्टी और आंखों के आगे धुंधलापन छाने की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंची। चूंकि महिला का पहले दो बार गर्भपात (Abortion) हो चुका था, इसलिए यह प्रेग्नेंसी पूरे परिवार के लिए बेहद अनमोल थी।
मरीज को पहले से माइग्रेन की बीमारी थी, जिसके कारण शुरुआत में उसे किसी दूसरे अस्पताल में सामान्य माइग्रेन समझकर ही दवाइयां दी गईं। लेकिन इन दवाओं के बाद भी उसकी हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई और उसकी आंखों की साइड की रोशनी (Peripheral Vision) कम होने लगी।
डॉक्टरों ने जब सावधानी बरतते हुए उसके दिमाग का एमआरआई (MRI) स्कैन कराया, तो बीमारी कुछ और ही निकली।महिला के दिमाग में मौजूद पिट्यूटरी ग्रंथि (Hormone Gland) के पास एक बड़ी गांठ (ट्यूमर) थी, जिसने आंखों की नस को बुरी तरह दबा दिया था। इतना ही नहीं, ग्रंथि के अंदर अचानक ब्लीडिंग होने लगी थी, जिसे मेडिकल भाषा में 'पिट्यूटरी अपोप्लेक्सी' (Pituitary Apoplexy) कहा जाता है। यह 10 हजार लोगों में से किसी एक को होने वाली ऐसी जानलेवा इमरजेंसी है, जिसमें जरा सी भी देरी महिला को हमेशा के लिए अंधा बना सकती थी।
डॉक्टरों की एक मल्टी-स्पेशलिस्ट टीम ने तुरंत फैसला लिया और गर्भ में पल रहे बच्चे को सुरक्षित रखते हुए, नाक के रास्ते से एक बेहद जटिल दूरबीन सर्जरी (Endoscopic Neurosurgery) कर इस ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाला। ऑपरेशन के बाद जब इस गांठ की बायोप्सी रिपोर्ट आई, तो पता चला कि यह कोई साधारण ट्यूमर नहीं था, बल्कि 'नेक्रोटाइजिंग ग्रेन्युलोमेटस हाइपोफायसाइटिस' (Necrotizing Granulomatous Hypophysitis) नाम की एक बेहद दुर्लभ सूजन की बीमारी थी, जो दुनिया में 90 लाख लोगों में से केवल किसी एक को होती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
26 May 2026, 7:24 PM IST
Published on:
26 May 2026, 7:23 PM IST
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