
आर्थराइटिस के हमले और सूजन को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- chatgtp)
Osteoarthritis in Women: बदलते लाइफस्टाइल और खानपान की आदतों के कारण जोड़ों में दर्द और आर्थराइटिस (गठिया) की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां इसे बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था, वहीं अब 30 से 40 साल की महिलाएं भी इसकी चपेट में आ रही हैं। सीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं को आर्थराइटिस होने का खतरा अधिक होता है।
रूमेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र वैष्णव से समझते हैं कि महिलाएं इसका आसान शिकार क्यों बनती हैं और इसके शुरुआती संकेत क्या हैं।
रूमेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र वैष्णव के अनुसार, पुरुषों और महिलाओं के शरीर की बनावट, हार्मोंस और इम्यून सिस्टम का व्यवहार काफी अलग होता है, जो महिलाओं को इस बीमारी के प्रति ज्यादा संवेदनशील बनाता है:
महिलाओं के शरीर में 'एस्ट्रोजन' हार्मोन हड्डियों और जोड़ों को मजबूत रखने के साथ-साथ सूजन (Inflammation) को रोकने का काम करता है। मेनोपॉज (मासिक धर्म बंद होने) के दौरान या उसके बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर अचानक बहुत गिर जाता है। इस हार्मोनल बदलाव के कारण जोड़ों का कार्टिलेज तेजी से घिसने लगता है, जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है।
गठिया का एक और खतरनाक रूप है 'रूमेटाइड आर्थराइटिस' (Rheumatoid Arthritis)। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, यानी इसमें शरीर का सुरक्षा तंत्र (Immune System) खुद ही अपने जोड़ों को दुश्मन मानकर उन पर हमला करने लगता है। डॉ. भूपेंद्र वैष्णव बताते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का इम्यून सिस्टम कुछ खास तरह के एंटीबॉडीज ज्यादा बनाता है, जिससे उनमें यह ऑटोइम्यून गठिया बहुत ज्यादा देखा जाता है।
महिलाओं के पेल्विस (कूल्हे की हड्डी) की बनावट पुरुषों से चौड़ी होती है। इस बनावट के कारण चलते या उठते-बैठते समय उनके घुटनों के जोड़ों पर संरेखण (Alignment) का दबाव पुरुषों से अलग और ज्यादा पड़ता है। इसके अलावा, थायराइड की समस्या या प्रेग्नेंसी के बाद बढ़ा हुआ वजन सीधे तौर पर घुटनों के कार्टिलेज को समय से पहले खराब कर देता है।
डॉ. भूपेंद्र वैष्णव के अनुसार, जोड़ों की सेहत को गंभीर नुकसान से बचाने के लिए इन शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है:
सुबह के समय जोड़ों का जाम होना (Morning Stiffness): सुबह सोकर उठने पर उंगलियों, कलाई या घुटनों में कड़ापन महसूस होना और उन्हें सामान्य करने में आधे घंटे से ज्यादा का समय लगना।
जोड़ों में लगातार दर्द और सूजन: बिना किसी चोट या खिंचाव के शरीर के छोटे या बड़े जोड़ों में लगातार हल्का दर्द रहना और वहां गर्माहट या हल्की सूजन महसूस होना।
जोड़ों से कट-कट की आवाज आना (Crepitus): घुटने मोड़ते समय या सीढ़ियां चढ़ते समय हड्डियों के आपस में टकराने जैसी आवाज आना, जो लुब्रिकेशन की कमी को दर्शाता है।
अचानक थकान और कमजोरी महसूस होना: जोड़ों में दर्द के साथ-साथ शरीर में हर वक्त भारीपन, सुस्ती और कभी-कभी हल्का बुखार रहना।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
26 May 2026 04:24 pm
Published on:
26 May 2026 04:16 pm
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