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Serum Institute Ebola Vaccine: इबोला के नए स्ट्रेन के लिए कोविड तकनीक से बनेगी वैक्सीन, ऑक्सफोर्ड संग जुटा भारत का सीरम इंस्टीट्यूट

Ebola Virus Congo: कांगो में खतरनाक बुंदीबुग्यो इबोला वायरस से 170 से ज्यादा मौतें। जानिए कैसे ऑक्सफोर्ड और भारत का सीरम इंस्टीट्यूट कोरोना की तकनीक से इसकी वैक्सीन बना रहे हैं।

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भारत

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Dimple Yadav

May 25, 2026

Oxford ChAdOx1 Vaccine, Serum Institute Ebola Vaccine, WHO Ebola Emergency 2026

इबोला के नए स्ट्रेन के लिए वैक्सीन प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- chatgtp)

Ebola New Strain: अफ्रीका के कांगो (DRC) में इस वक्त इबोला वायरस के एक बेहद खतरनाक रूप बुंदीबुग्यो (Bundibugyo) का कहर देखने को मिल रहा है। इस खतरनाक वायरस की वजह से अब तक 170 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, और इसके मरीजों की संख्या 750 के पार पहुंच चुकी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे इंटरनेशनल इमरजेंसी घोषित कर दिया है और कांगो में इसके राष्ट्रीय महामारी बनने का खतरा 'बहुत ज्यादा' बताया है।

राहत की बात यह है कि वैज्ञानिक इस जानलेवा बीमारी को हराने के लिए उसी तकनीक का सहारा ले रहे हैं, जिसने कोरोना महामारी के दौरान करोड़ों लोगों की जान बचाई थी।

कोरोना वैक्सीन वाली तकनीक से बनेगी इबोला की दवा

इस इबोला वायरस से निपटने के लिए फिलहाल दुनिया में कोई अप्रूव्ड (मान्यता प्राप्त) वैक्सीन या इलाज मौजूद नहीं है। ऐसे में ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के वैज्ञानिक भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के साथ मिलकर युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं। वैज्ञानिक कोरोना काल में मशहूर हुई 'ChAdOx1' (वायरल-वेक्टर) तकनीक में जरूरी बदलाव कर रहे हैं, ताकि बुंदीबुग्यो इबोला वायरस के खिलाफ एक असरदार वैक्सीन तुरंत तैयार की जा सके।

यह वही तकनीक है जिसके दम पर बनी ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका (कोविशील्ड) वैक्सीन ने दुनिया भर में पहले ही साल में लगभग 60 लाख से ज्यादा लोगों की जान बचाई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि बरसों की रिसर्च और मजबूत ग्लोबल पार्टनरशिप के कारण ही आज हम इतनी तेजी से नई वैक्सीन बनाने की स्थिति में आ पाए हैं।

एक और उम्मीद: कोरोना की दवा से इबोला पर वार

वैक्सीन के अलावा, इलाज के स्तर पर भी एक बड़ा प्रयोग चल रहा है। WHO की मुख्य वैज्ञानिक सिल्वी ब्रियांड के अनुसार, ओबेल्डेसिविर (Obeldesivir) नाम की एक एंटीवायरल दवा का इस्तेमाल उन लोगों पर किया जा सकता है जो इबोला मरीजों के संपर्क में आए हैं, ताकि उन्हें यह बीमारी होने से रोका जा सके। यह दरअसल कोरोना के इलाज के लिए बनाई गई 'गिलियड साइंसेज' कंपनी की एक प्रायोगिक (एक्सपेरिमेंटल) खाने वाली दवा है। हालांकि, डॉक्टर अभी इसे बेहद कड़े नियमों और निगरानी के बीच ही मरीजों को देने की बात कह रहे हैं।

इबोला को कम आंकना होगी बड़ी भूल

WHO के अफ्रीका रीजनल डायरेक्टर मोहम्मद याकूब जनाबी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस इबोला आउटब्रेक को हल्के में लेना पूरी दुनिया के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि हाल ही में क्रूज़ शिप पर फैले 'हंतावायरस' को तो पूरी दुनिया ने तवज्जो दी क्योंकि उसमें अमीर देशों के लोग शामिल थे, लेकिन कांगो के इबोला संकट पर दुनिया का ध्यान उतना नहीं है।

डॉक्टर जनाबी कहते हैं, "दुनिया को सुरक्षित रखने के लिए इबोला का सिर्फ एक मरीज ही काफी है। आज के दौर में लोग इतनी तेजी से एक देश से दूसरे देश यात्रा करते हैं कि कोई भी सुरक्षित नहीं है। हमें इसे फैलने से रोकने के लिए तुरंत आपसी सहयोग बढ़ाना होगा।"

क्या है इबोला और यह कैसे फैलता है?

इबोला एक बेहद जानलेवा वायरस है, जिसकी चपेट में आने पर मरीज को तेज बुखार, बदन दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत होती है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों (जैसे खून, थूक या पसीना), दूषित कपड़ों-बिस्तरों या इबोला से मरे हुए व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। फिलहाल स्वास्थ्य टीमें जमीन पर उतरकर टेस्टिंग बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने में जुटी हैं ताकि इस जानलेवा वायरस को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।