
कैंसर अवेयरनेस की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo- freepik)
Cancer Causes: कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का नाम सुनते ही अक्सर लोग खुद को बेबस महसूस करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि यह पूरी तरह किस्मत का खेल है। लेकिन विज्ञान और हालिया शोध कुछ और ही हकीकत बयां करते हैं। मेडिकल जर्नल नेचर मेडिसिन (Nature Medicine) में प्रकाशित 'इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर पब्लिक हेल्थ' के एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में 30 से 40% तक कैंसर के मामलों को आसानी से रोका जा सकता है। इनमें भी फेफड़ों (सांस की नली), पेट और रीप्रोडक्टिव ऑर्गन्स (प्रजनन अंगों) से जुड़े कैंसर सबसे आगे हैं, जो रोके जा सकने वाले कुल मामलों का आधा हिस्सा हैं।
इसका सीधा सा मतलब यह है कि हर साल दुनिया भर में लाखों लोगों की जान सिर्फ इसलिए बचाई जा सकती है क्योंकि ये कैंसर किसी आनुवंशिक खराबी से नहीं, बल्कि हमारी आदतों, कामकाजी माहौल और पर्यावरण के प्रदूषण की वजह से होते हैं।
इस ऐतिहासिक रिसर्च के मुताबिक, आज भी तंबाकू (धूम्रपान और गुटखा) कैंसर पैदा करने वाला सबसे बड़ा और ऐसा कारण है जिसे हम खुद रोक सकते हैं। साल 2022 के आंकड़ों को देखें तो दुनिया भर में कैंसर के जितने भी नए मरीज सामने आए, उनमें से 15% की वजह सिर्फ तंबाकू थी। पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा और भी डरावना हो सकता है, वहां हर 100 में से 23 नए कैंसर मरीज तंबाकू के शिकार थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि अगर तंबाकू और शराब की लत को मिला दिया जाए, तो रोके जा सकने वाले कुल कैंसर के लगभग आधे (48%) मामले सिर्फ इन दोनों आदतों की वजह से होते हैं। अकेले शराब के कारण साल भर में 3.2% यानी लगभग 7 लाख नए कैंसर के मामले दर्ज किए गए।
महिलाओं में कैंसर की एक बड़ी वजह कुछ खास तरह के वायरल इन्फेक्शन पाए गए हैं। इनमें ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) सबसे प्रमुख है, जो महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय के मुंह का कैंसर) की मुख्य वजह बनता है। राहत की बात यह है कि अब इससे बचाने वाली वैक्सीन (टीका) बाजार में उपलब्ध है, लेकिन कमी सिर्फ इतनी है कि कई गरीब और विकासशील देशों में यह वैक्सीन अभी भी जरूरतमंद लड़कियों तक नहीं पहुंच पा रही है।
दूसरी ओर, पुरुषों में पेट (गैस्ट्रिक) का कैंसर ज्यादा देखा गया है। इसका संबंध तंबाकू के साथ-साथ खराब खान-पान, गंदगी, दूषित पानी और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में रहने के कारण होने वाले बैक्टीरिया के इन्फेक्शन (जैसे H. pylori) से है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह दुनिया का ऐसा पहला रिसर्च है, जिसने इतने बड़े स्तर पर यह साफ-साफ बताया है कि हमारी रोजमर्रा की किन आदतों (Modifiable Factors) को बदलकर हम कैंसर जैसी बीमारी को शरीर में पनपने से पहले ही खत्म कर सकते हैं। जब सरकारें और आम नागरिक इन खतरों को ठीक से समझेंगे, तभी वे कैंसर के खिलाफ एक मजबूत और सटीक जंग लड़ पाएंगे। बीमारी होने के बाद महंगे इलाज की कतार में खड़े होने से कहीं बेहतर है कि हम आज ही अपनी लाइफस्टाइल में सुधार कर लें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
25 May 2026 06:45 pm
Published on:
25 May 2026 05:39 pm
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