स्वास्थ्य

Cancer Drug Price Cut: कैंसर मरीजों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब 70% सस्ती मिलेगी ये ‘जीवन रक्षक’ दवा!

Cancer Drug Price Cut: दिल्ली हाईकोर्ट ने जनहित में निवोलुमैब की सस्ती बायोसिमिलर को मंजूरी दी। 70% कम कीमत से कैंसर इलाज होगा ज्यादा सुलभ।
2 min read
• •
Updated: 13 Jan 2026, 3:08 PM IST
Cancer Drug Price Cut
Cancer Drug Price Cut (photo- freepik)

Cancer Drug Price Cut: दिल्ली हाईकोर्ट ने जनहित को ध्यान में रखते हुए कैंसर मरीजों के लिए एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने Zydus Lifesciences को मशहूर कैंसर दवा निवोलुमैब (Nivolumab) का सस्ता बायोसिमिलर बनाने और बेचने की अनुमति दे दी है। यह दवा अमेरिका की कंपनी Bristol Myers Squibb (BMS) की पेटेंटेड दवा Opdiva का विकल्प है, जिसकी कीमत काफी ज्यादा है। जाइडस की दवा करीब 70 प्रतिशत सस्ती बताई जा रही है, जिससे कैंसर के इलाज को आम मरीजों के लिए ज्यादा सुलभ बनाया जा सकेगा।

मरीजों को राहत, इलाज होगा सस्ता

निवोलुमैब एक लाइफ सेविंग इम्यूनोथेरेपी दवा है, जिसका इस्तेमाल कई तरह के जानलेवा कैंसर के इलाज में किया जाता है। अब तक इसकी ऊंची कीमत की वजह से कई मरीज इसे नहीं ले पाते थे। स्वास्थ्य के नजरिए से देखें तो इस फैसले से हजारों कैंसर मरीजों को बड़ा फायदा मिल सकता है, क्योंकि अब उन्हें कम कीमत पर इलाज का विकल्प मिलेगा।

पहले क्यों लगी थी रोक

पिछले साल दिल्ली हाईकोर्ट की एक सिंगल बेंच ने ज़ाइडस की बायोसिमिलर दवा ZRC 3276 को बाजार में उतारने से रोक दिया था। कोर्ट का मानना था कि यह दवा BMS के पेटेंट का उल्लंघन करती है। हालांकि, अब डिवीजन बेंच ने उस फैसले को पलटते हुए जनहित को प्राथमिकता दी है।

कोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस सी हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने कहा कि जब मामला जीवन रक्षक दवा का हो, तो अदालत को जनहित के पक्ष में झुकना चाहिए। कोर्ट ने साफ कहा कि बीमार लोगों को इलाज से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं होगा, खासकर तब जब पेटेंट की अवधि खत्म होने में सिर्फ चार महीने बचे हों। BMS का पेटेंट 2 मई 2026 को खत्म हो रहा है।

संतुलन बनाने की कोशिश

कोर्ट ने यह भी माना कि पेटेंट का संरक्षण जरूरी है, ताकि नई दवाओं के आविष्कार को बढ़ावा मिलता रहे। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर सिर्फ पेटेंट के नाम पर मरीजों को इलाज से दूर रखा जाए, तो यह समाज के लिए नुकसानदेह होगा। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए कोर्ट ने जाइडस को निर्देश दिया है कि वह पेटेंट खत्म होने तक अपनी दवा की बिक्री का पूरा हिसाब रखे।

स्वास्थ्य के नजरिए से क्यों है यह फैसला अहम

भारत में कैंसर का इलाज पहले ही आम लोगों की पहुंच से बाहर माना जाता है। इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक दवाएं तो और भी महंगी होती हैं। ऐसे में सस्ती बायोसिमिलर दवाओं की एंट्री से न सिर्फ इलाज का खर्च घटेगा, बल्कि इलाज जल्दी शुरू होने की संभावना भी बढ़ेगी, जिससे मरीजों की जान बच सकती है।

मरीज और सिस्टम दोनों को फायदा

इस फैसले से मरीजों को राहत मिलेगी और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी आर्थिक बोझ कम होगा। साथ ही, कोर्ट ने यह साफ किया है कि जनहित और पेटेंट अधिकार दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। कुल मिलाकर, यह फैसला स्वास्थ्य के लिहाज से एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जो मरीजों की जरूरतों को सबसे ऊपर रखता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
13 Jan 2026, 3:08 PM IST
Published on:
Also Read
View All
पुलिस की दोहरी कार्रवाई: 27 किलो डोडा चूरा के साथ गिरफ्तार आरोपी के घर चल रही थी नकली घी की फैक्ट्री

Cancer Pain: कैंसर के दर्द को सहना जरूरी नहीं, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए दर्द से राहत देने वाले उपचार और प्रभावी तरीके

Age Regression: डर, तनाव या पुराने सदमे से जुड़ा हो सकता है बचपन जैसा व्यवहार, क्लीवलैंड क्लिनिक से जानिए एज रिग्रेशन के संकेत

Shamonda Virus Explained: फ्रांस में पहली बार इंसान में कैसे पहुंचा शामोन्डा वायरस, WHO और ECDC से जानें फैलने का तरीका

World Polio Day 2026: क्या आपके बच्चे का पोलियो टीकाकरण पूरा है? सीडीसी से जानें कैसे काम करती है ये वैक्सीन, OPV और fIPV का सही चार्ट