स्वास्थ्य

Shortness of Breath: सुबह की ठंडी हवा में अचानक सांस फूलना, मेयो क्लिनिक ने बताया Asthma के मरीजों के अलावा इन लोगों को भी हो सकता है

Shortness of Breath: सुबह की ठंडी हवा में सांस क्यों फूलती है? जानें क्लीवलैंड और मेयो क्लिनिक के अनुसार एस्थमा, सीओपीडी और फेफड़ों की समस्याओं में ठंड का असर और इससे बचाव के उपाय।
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Oct 08, 2026
Person experiencing shortness of breath in cold air
सुबह की ठंडी हवा में अचानक सांस क्यों फूल जाता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Shortness of Breath Cause: सर्दी का मौसम आते ही या सुबह की ठंडी-ठंडी हवा में सैर पर निकलते ही कई लोगों का सीना भारी होने लगता है और सांस फूलने लगती है। अक्सर लोग इसे केवल अस्थमा यानी दमा की बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या सिर्फ अस्थमा के मरीजों की समस्या मानते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। क्लीवलैंड क्लिनिक और मेयो क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, सुबह की शुष्क और बर्फीली हवा सिर्फ अस्थमा के मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य सेहत से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे लोगों और सामान्य इंसानों के फेफड़ों को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। जब हम सुबह-सुबह ठंडी हवा में सांस लेते हैं, तो हमारे फेफड़े और सांस की नलियां एक खास तरह से प्रतिक्रिया करती हैं। आइए समझते हैं कि ठंडी हवा हमारे सांस लेने के तरीके को कैसे बदल देती है, अस्थमा के अलावा किन लोगों को इससे ज्यादा खतरा है और इससे बचने के क्या उपाय हैं।

ठंडी हवा में सांस क्यों फूलने लगती है?

जब हम सामान्य या गर्म मौसम में सांस लेते हैं, तो हमारी नाक और गला उस हवा को फेफड़ों तक पहुंचाने से पहले थोड़ा गर्म और नम कर देते हैं। लेकिन सर्दी के मौसम में या तड़के सुबह चलने वाली हवा बहुत ज्यादा ठंडी और सूखी (ड्राई) होती है। जब यह ठंडी और सूखी हवा सीधे हमारी सांस की नली (Airways) में जाती है, तो वहां मौजूद नमी तेजी से सूखने लगती है। नमी खत्म होने के कारण सांस की नलियों में जलन होती है और उनमें अचानक ऐंठन पैदा हो जाती है। इसे मेडिकल भाषा में ब्रोंकोस्पाज्म (Bronchospasm) कहते हैं। इसकी वजह से सांस की नलियां सिकुड़ कर पतली हो जाती हैं, फेफड़ों में हवा आसानी से अंदर-बाहर नहीं जा पाती और व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न व खांसी होने लगती है।

अस्थमा के अलावा किन लोगों को है ज्यादा खतरा?

मेयो क्लिनिक और क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, सुबह की ठंडी हवा का असर सिर्फ दमा के मरीजों तक सीमित नहीं है। इन समस्याओं से पीड़ित लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए;

  • सीओपीडी (COPD) के मरीज।
  • हाल ही में हुआ सर्दी, जुकाम या फ्लू।
  • कोल्ड-इंड्यूस्ड ब्रोंकोस्पाज्म (EIB)।
  • हृदय रोगी (Heart Patients)।
  • धूम्रपान (Smoking) करने वाले लोग।

सुबह की ठंडी हवा से होने वाले मुख्य लक्षण

अगर ठंडी हवा आपके फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है, तो आपको सुबह के समय ये लक्षण महसूस हो सकते हैं;

  • सांस लेते समय सीने में भारीपन या जकड़न महसूस होना।
  • सांस खींचते या छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज (Wheezing) आना।
  • लगातार सूखी खांसी होना, जो बंद कमरे में जाने के बाद ही रुकती है।
  • थोड़ी सी वॉक करने या सीढ़ियां चढ़ने पर ही बहुत जल्दी सांस फूल जाना।
  • गले में सूखापन और खिचखिच होना।

ठंडी हवा के खतरे से बचने के उपाय

  • मुंह और नाक ढककर निकलें।
  • नाक से सांस लें, मुंह से नहीं।
  • अचानक भारी एक्सरसाइज न करें।
  • इन्हेलर पास रखें।
  • ज्यादा ठंड में वॉक का समय बदलें।
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
08 Oct 2026 12:00 pm
Published on:
08 Oct 2026 12:00 pm