
कब्ज की समस्या प्रेग्नेंसी के दौरान आमतौर पर 80 फीसद महिलाओं को किसी न किसी सेमेस्टर में होती है। इसका मुख्य कारण अचानक हार्मोनस में होने वाला बदलाव है। कई बार कब्ज की दिक्कत गंभीर समस्या भी बन जाती है जिसके लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है। इससे निजात पाने के लिए जीवनशैली में हल्की फुल्की फिजिकल एक्टिविटी को जोडऩे के अलावा डाइट में तरल चीजें थोड़ी ज्यादा खाने के लिए कहते हैं। जानते हैं इस बारे में विस्तार से विशेषज्ञ से-
आंतों पर दबाव
गर्भावस्था के दौरान प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन का स्त्राव बढऩे से नाजुक और नरम मांसपेशियों को और ज्यादा आराम मिलने लगता है। ऐसे में पाचनतंत्र की मांसपेशियों के प्रभावित होने से इसकी कार्यप्रणाली पर असर होता है। इसलिए भोजन के स्टूल के रूप में बाहर निकलने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसके अलावा दूसरी और तीसरी तिमाही में गर्भस्थ शिशु का आकार बढ़ने से भी आंतों पर दबाव पड़ता है जिससे कब्ज की शिकायत रहती है।
ध्यान दें
कब्ज की दिक्कत आमतौर पर सही हो जाती है। लेकिन जिनके यह समस्या बनी रहे तो इसका कोई और कारण या रोग हो सकता है। यदि लंबे समय तक कब्ज के साथ पेटदर्द, स्टूल के साथ म्यूकस या खून आने की शिकायत हो तो विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करना चाहिए। कई बार सख्त स्टूल आना आंतों की नसों में सूजन का संकेत हो सकता है। ऐसे में दर्द यदि ज्यादा हो और स्टूल के साथ बार-बार खून आए तो इसे नजरअंदाज न करें।
इस तरह पाएं कब्ज से निजात
हाई फाइबर डाइट लें - फाइबर से युक्त मूंग, चना जैसे साबुत अनाज, ब्राउन राइस, बींस और ताजे फल व सब्जियां खाने से फायदा होता है। दालें ज्यादा से ज्यादा लें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं - शरीर में तरल की मात्रा सामान्य बनी रहने से भोजन को पचने में आसानी होती है। ऐसे में रोजाना 7-8 गिलास पानी पीएं। जूस, सूप भी पी सकती हैं।
हल्का फुल्का वर्कआउट करें - शरीर को अंदरूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए फिजिकल एक्टिविटी करें। वॉक, योग, प्राणायाम, स्वीमिंग, डांस करें। भोजन पचने में आसानी होगी।
आंतों की हरकत समझें - अक्सर भोजन करने के बाद या तो पेट में भारीपन महसूस होता है या फिर गुडग़ुड़ जैसी आवाज आने जैसा महसूस होता है। ऐसे में इन्हें समझें।
आयरन की हाई डोज - प्रेग्नेंसी के दौरान चलने वाली प्रमुख दवाओं में से जब आयरन की डोज जरूरत से ज्यादा या अनियमित रूप से ली जाए तो भी कब्ज की शिकायत रहती है। डोज व डाइट में भोजन से मिलने वाले आयरन की मात्रा बैलेंस करें।
एक्सपर्ट : डॉ. मधु पाटनी भट्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ, सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर