
सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज। यह एक फेफड़ों की बीमारी है। हवा के रास्ते प्रदूषित कण फेफड़ों में पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हैं। यह धीरे-धीरे फेफड़ों को संक्रमित कर देते हंै। दुनिया में सबसे अधिक होने वाली मौतों में सीओपीडी तीसरे स्थान पर है। विश्व सीओपीडी दिवस हर साल नवंबर के तीसरे बुधवार (18 नवंबर) को मनाया जाता है।
कोविड गंभीर हो जाता
सीओपीडी के रोगियों को कोरोना होने पर स्थिति गंभीर हो जाती है। मरीज की मृत्यु की आशंका भी 3-4 गुना अधिक हो जाती है। सीओपीडी के कारण रोगी के फेफड़े पहले से ही कमजोर होते हैं। ऐसे में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम होता है। इस तरह के मरीजों की रिकवरी भी काफी धीमी होती है। अगर मरीज स्मोकिंग करता है तो इसका खतरा कई गुना और बढ़ जाता है।
बीमारी कब हुई मरीज को पता नहीं चलता
यह बीमारी होने पर मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है। यह समस्या अचानक से नहीं होती है बल्कि धीरे-धीरे होती है। सीओपीडी बीमारी कब मरीज को होती है इसका पता नहीं चलता है। जब इसके लक्षण गंभीर होने लगते हैं और दिनचर्या प्रभावित होने लगती है तो इसका पता चलता है। इलाज के बाद इसको पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन लक्षणों को कम किया जा सकता है।
इ सके मरीज वैक्सीन जरूर लगवाएं। सीओपीडी के रोगियों में दो तरह के वैक्सीन लगते हैं। पहला, फ्लू का, जो कि साल में एक बार लगता है। दूसरा न्यूमोकॉकल टीका है। यह तीन या पांच साल में एक बार लगता है। फ्लू के टीके मौसमी संक्रमण से बचाते हैं और न्यूमोकॉकल निमोनिया से। देखा गया है कि जिन्होंने वैक्सीन लगवाया था उनमें कोविड कम गंभीर हुआ। अपनी दवाइयां समय से लें। बिना डॉक्टरी सलाह दवा न छोड़ें।
इस तरह होते हैं लक्षण
सुबह खांसी आना, धीरे-धीरे खांसी बढऩे लगती, बलगम भी निकलता है। सर्दी के दिनों में दिक्कत बढ़ जाती है। बीमारी गंभीर होने पर मरीज का सांस फूलने लगना, छाती आगे निकलना और रोगी को फेफड़े के अंदर रुकी हुई सांस को बाहर निकालने में परेशानी होती है। होंठों को गोल कर मेहनत के साथ सांस बाहर निकालना पड़ता है, जिसे मेडिकल भाषा में पर्स लिप ब्रीदिंग कहते हैं। पैरों में सूजन, वजन घटना, भूलने की समस्या, तनाव और हृदय से जुड़ी परेशानी भी होती है। स्पाइरोमेट्री से फेफड़ों की ताकत की जांच होती है। बलगम और एक्सरे टेस्ट से बीमारी पता चलता है।
ठंडी चीजों को खाने से बचें, दिक्कत बढ़ती है
वायु प्रदूषण, गाडिय़ों का धुआं, धूम्रपान और चूल्हे के धुएं से बचें। सीओपीडी में वजन नियंत्रित रखें। इससे सांस लेने में अधिक ऊर्जा यानी ज्यादा कैलोरी की जरूरत पड़ती है। थकान होने लगती है। ठंडी चीजों को खाने से बचें। इससे भी दिक्कत बढ़ जाती है। मौसमी फल-सब्जियां अधिक मात्रा में खाएं। इसमें रोज सांस से जुड़े व्यायाम करना चाहिए। प्राणायाम भी इसमें काफी कारगर है लेकिन अगर बीमारी गंभीर है तो बिना डॉक्टरी सलाह कोई व्यायाम करने से बचें।