
भाद्रपद माह में ही कृष्ण जन्म अष्टमी मनाते हैं और धनिया से बनी पंजीरी प्रसाद में लेते हैं। धनिया मानसून रोगों से बचाती है। वर्षा ऋतु में वात का प्रकोप, कफ और पित्त का संचय बढ़ जाता है। इससे पेट की अग्रिमंद हो जाती और पाचन बिगड़ जाता है। वात बढऩे से नर्वस सिस्टम प्रभावित होता, शरीर में दर्द या जकडऩ बढ़ जाती है। धनिया दूषित तत्वों को बाहर निकलती है। इनमें फाइबर, कैल्शियम व एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। इसमें मिश्री मिलाते हैं तो इसकी ठंडी तासीर पेट के संक्रमण और इससे जुड़े रोगों से बचाव होता है। कफ-पित्त का शमन करती है।
ऐसे तैयार करें पंजीरी
धनिया का चूर्ण बनाकर घी में भून लें। इसे स्वादिष्ट-गुणकारी बनाने के लिए इसमें भुना मखाना और चिरौंजी मिला सकते हैं। धनिया-मेवे का एक चौथाई हिस्सा मिश्री पाउडर या बूरा मिला लें। पंचीरी तैयार हो गई।
डॉ.कमला आर. नागर और डॉ. राकेश नगर, आयुर्वेद विशेषज्ञ, जयपुर