स्वास्थ्य

पेरेंट्स सावधान! 2 साल से कम बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं Cough Syrups, Health Ministry ने जारी की चेतावनी

Health Ministry Advisory: DGHS ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि 2 साल से छोटे बच्चों को खांसी की दवा (Cough Syrup) न दें। जानें इसके खतरे, सावधानियां और घरेलू उपाय।

2 min read
Oct 04, 2025
Health Ministry Advisory (photo- gemini ai)

Health Ministry Advisory: हाल ही में मध्यप्रदेश और राजस्थान में खांसी की दवा (Cough Syrup) पीने से 12 बच्चों की मौत के मामले सामने आए। इसके बाद Directorate General of Health Services (DGHS) ने देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खास एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि बच्चों को खांसी की दवा बहुत सोच-समझकर और डॉक्टर की सलाह के बिना बिल्कुल नहीं देनी चाहिए।

ये भी पढ़ें

Ban: MP और राजस्थान में कफ सिरप पीने से 12 बच्चों की मौत, तमिलनाडु में बैन, केंद्र सरकार बोली- 2 साल तक बच्चोंं को न दें खांसी की दवा

बच्चों को खांसी की दवा क्यों नहीं देनी चाहिए?

DGHS का कहना है कि छोटे बच्चों में खांसी और जुकाम जैसी बीमारियां ज्यादातर अपने आप ठीक हो जाती हैं। इसके लिए दवा की जरूरत नहीं होती। खांसी की दवाएं दो साल से छोटे बच्चों को बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए। पांच साल तक के बच्चों में भी इन दवाओं का इस्तेमाल बहुत ही सीमित और डॉक्टर की सख्त निगरानी में होना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि इन दवाओं का गलत इस्तेमाल बच्चों में गंभीर दिक्कतें पैदा कर सकता है। खासकर जब कई तरह की दवाओं का कॉम्बिनेशन दिया जाता है या फिर डोज का ध्यान नहीं रखा जाता।

डॉक्टर क्या कहते हैं?

DGHS ने साफ किया है कि बच्चों में खांसी-जुकाम होने पर पहले बिना दवा वाले उपाय (non-pharmacological measures) अपनाने चाहिए। जैसे बच्चों को ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाएं। उन्हें आराम करने दें। गर्म सूप या दूध जैसी चीजें दें।भाप (steam) दिलाना भी राहत दे सकता है। नकली और मिलावटी दवाओं से खतरा

रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कुछ जगह बच्चों की मौत नकली या घटिया दवाओं की वजह से हुई। इसलिए DGHS ने सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया है कि वे सिर्फ Good Manufacturing Practices (GMP) वाले और क्वालिटी-टेस्टेड प्रोडक्ट ही खरीदें और मरीजों को दें।

जांच में क्या सामने आया?

मृत्यु के मामलों की जांच NCDC, NIV, ICMR और AIIMS नागपुर की टीम कर रही है। अब तक की टेस्ट रिपोर्ट्स में यह पाया गया है कि बच्चों की मौत वाले सैंपल्स में diethylene glycol (DEG) या ethylene glycol (EG) जैसे ज़हरीले केमिकल नहीं मिले। कुछ मामलों में अन्य इंफेक्शन (जैसे लेप्टोस्पायरोसिस) की भी पुष्टि हुई है।

माता-पिता के लिए जरूरी सावधानी

बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कभी खांसी की दवा न दें। दो साल से छोटे बच्चों में यह बिल्कुल वर्जित है। किसी भी दवा का इस्तेमाल करते वक्त उसके डोज और अवधि पर खास ध्यान दें। अगर बच्चा लगातार खांस रहा है या सांस लेने में दिक्कत है तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

ये भी पढ़ें

कफ सिरप पर केंद्र की एडवायजरी, बच्चों के लिए खांसी की दवाई पर बैन

Also Read
View All

अगली खबर