
बनासकांठा । गुजरात के बनासकांठा में कोरोना मरीजों के उपचार के लिए अनोखा प्रयोग किया गया है। जिले के टेटोडा गांव में एक गौशाला में कोविड-19 सेंटर खोला गया है। इसका नाम 'वेदालक्षन पंचगव्य आयुर्वेद कोविड आइसोलेशन सेंटर' है। यहां अंग्रेजी दवाइयों के साथ-साथ गाय के दूध और गोमूत्र से बनी आयुर्वेदिक दवाओं के जरिए मरीजों का मुफ्त उपचार किया जा रहा है। सरकारी अस्पताल में टेस्ट के बाद जो मरीज कोरोना संक्रमित पाए जाते हैं, उन्हें यहां भर्ती किया जाता है।
जिनका मरीजों का ऑक्सीजन सेचुरेशन (संतृप्ति) लेवल 80 तक गिर जाता है, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है। यहां मेडिकल ऑक्सीजन की व्यवस्था भी है। आइसोलेशन सेंटर में एक एलोपैथिक, एक आयुर्वेदिक डॉक्टर और पांच नर्सें हैं। सभी लगातार मरीजों की निगरानी करते हैं। केंद्र के 50 बेड में से 40 फिलहाल बुक है। गौशाला में 90 दुधारू समेत 5,000 गायें हैं।
शुद्ध ऑक्सीजन के लिए हवन-
केंद्र के निदेशक रामरतन महाराज का कहना है कि रोगियों के इलाज में पंचगव्य आयुर्वेदिक चिकित्सा का उपयोग हो रहा है। मरीजों को गोमूत्र, घी और गाय के दूध से बनी दवाइयां दी जाती हैं। उन्हें पारंपरिक खेती के जरिए उगाए गए अनाज से बना भोजन दिया जाता है। महाराज ने बताया कि वातावरण में ऑक्सीजन का उच्च स्तर बनाए रखने के लिए लगातार हवन और पूजा की जाती है।
विशेषज्ञों की अलग-अलग राय-
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के सहायक अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी का कहना है कि यह व्यवस्था हल्के लक्षण वाले कोरोना मरीजों के लिए बेहतर है। हालांकि गौशाला में दिया जाने वाला आयुर्वेदिक उपचार एलोपैथिक ट्रीटमेंट की जगह नहीं ले सकता, गंभीर और कम ऑक्सीजन लेवल वाले मरीजों में तो बिल्कुल भी नहीं। डायटीशियन डॉ. तालगुनी पारेख का कहना है कि जिन मरीजों को होम आइसोलेट होने की सलाह दी गई है, उनके लिए यह सेंटर फायदेमंद है, क्योंकि यहां ऑर्गेनिक खाना और अच्छी गुणवत्ता वाला दूध मिलता है। उन्होंने कहा कि अच्छा भोजन कोविड—19 उपचार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।