
एक अध्ययन के अनुसार, कोविड-19 (Covid-19 ) से संक्रमित लोगों में संक्रमण के एक साल या उससे अधिक समय बाद भी उनकी सोचने-समझने (Cognitive) और याददाश्त (Memory) से जुड़ी कमजोरियां बनी रह सकती हैं।
इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन गुरुवार को प्रकाशित हुआ था। शोध में पाया गया कि अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों, लंबे समय तक लक्षणों का अनुभव करने वालों या वायरस के पुराने रूपों से संक्रमित लोगों में ये कमजोरियां अधिक गंभीर थीं।
यह अध्ययन "न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन" में प्रकाशित हुआ है। इसमें 140,000 से अधिक प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिन्होंने कम से कम एक संज्ञानात्मक कार्य पूरा किया। इनमें से कई लोगों को कोविड-19 की अलग-अलग गंभीरता और लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षणों का अनुभव हुआ था।
अध्ययन के नतीजों से पता चला है कि संक्रमण के एक साल या उससे अधिक समय बाद भी मामूली कमजोरियां देखी गईं, भले ही लोगों की बीमारी कम समय की रही हो।
ये कमजोरियां सोचने-समझने के कई क्षेत्रों में पाई गईं, जिनमें सबसे खास रूप से स्मृति शामिल है। उदाहरण के लिए, कुछ मिनट पहले देखी गई वस्तुओं की तस्वीरों को याद रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह जल्दी भूल जाने की बजाय नई यादें बनाने में समस्या के कारण हो सकता है।
कार्यकारी और तर्क करने की क्षमताओं का परीक्षण करने वाले कुछ कार्यों में भी मामूली कमजोरियां पाई गईं, जैसे कि स्थानिक योजना या मौखिक तर्क की आवश्यकता वाले कार्य।
इसके अलावा, ये कमजोरियां 12 सप्ताह या उससे अधिक समय तक चलने वाले लक्षणों वाले लोगों (लंबे कोविड के अनुरूप), अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों या SARS-CoV-2 वायरस के शुरुआती रूपों में से किसी एक से संक्रमित लोगों में अधिक गंभीर पाई गईं।
अध्ययन के प्रमुख लेखक, इंपीरियल कॉलेज लंदन के ब्रेन साइंसेज विभाग के प्रोफेसर एडम हैम्पशायर ने कहा, "कोविड-19 (Covid-19 ) के संज्ञानात्मक कार्यों पर दीर्घकालिक प्रभाव जनता, स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों और नीति निर्माताओं के लिए एक चिंता का विषय रहे हैं, लेकिन अब तक बड़े पैमाने पर आबादी के नमूने में उन्हें निष्पक्ष रूप से मापना मुश्किल था।"
उन्होंने आगे कहा, "बड़े पैमाने पर संज्ञान और स्मृति के कई पहलुओं को मापने के लिए अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके, हम संज्ञानात्मक कार्यों के प्रदर्शन में छोटे लेकिन मापने योग्य कमजोरियों का पता लगाने में सक्षम थे। हमने यह भी पाया कि बीमारी की अवधि, वायरस के प्रकार और अस्पताल में भर्ती जैसे कारकों के आधार पर लोगों के प्रभावित होने की संभावना अलग-अलग होती है।"
(आईएएनएस)