
शरीर में असामान्य रूप से कार्टिसोल हार्मोन (तनाव के लिए जिम्मेदार) का स्तर बढऩे को कुशिंग सिंड्रोम/हाइपरकॉर्टिसोलिज्म कहते हैं। इसमें शरीर के विभिन्न अंगों में फैट बढऩे लगता है जो सूजन की तरह दिखता है। मांसपेशियां व हड्डियां कमजोर होने के साथ ही थकान, मुंहासे जैसी दिक्कतें होती हैं। कुछ मामलों में फैट के स्ट्रेच माक्र्स भी दिखने लगते हैं।
इसलिए होता ऐसा : किडनी के एकदम ऊपरी हिस्से में मौजूद एड्रिनल गं्रथि से स्रावित होने वाले कार्टिसोल के अधिक मात्रा में होने से दिक्कतें होती हैं। वैसे तो इसके कई कारण हैं लेकिन मुख्य रूप से कॉॢटकॉस्टेरॉइड दवाओं (अस्थमा, रुमेटॉइड, आर्थराइटिस, ल्यूपस और अंग प्रत्यारोपण के बाद ली जाने वाली दवा) को अधिक लेने पर ऐसा होता है।
जीवनशैली में करें बदलाव : ब्लड टेस्ट और कार्टिसोल टेस्ट से पता किया जाता है कि शरीर में कार्टिसोल हार्मोन का स्तर कितना बढ़ा हुआ है। इसी आधार पर दिनचर्या और खानपान में बदलाव करते हैं। हड्डियों व मांसपेशियों के लिए कैल्शियम और विटामिन-डी युक्त चीजें लेने की सलाह देते हैं।