
Post Pregnancy Body Changes: डिलीवरी के बाद महिला के शरीर को पहले जैसी स्थिति में आने में समय लगता है। इस दौरान कमर और पैरों में दर्द समेत कई तरह की शारीरिक परेशानियां हो सकती हैं। बच्चे की देखभाल के दौरान बार बार झुकना, बच्चे को उठाना और लंबे समय तक गलत तरीके से बैठना भी कमर पर दबाव डाल सकता है। हालांकि, इस दौरान होने वाला हर दर्द सामान्य नहीं होता। कुछ लक्षण गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं डिलीवरी के बाद कमर और पैरों में दर्द की वजह क्या हो सकती है और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद होने वाली कुछ शारीरिक परेशानियां गर्भावस्था या डिलीवरी से जुड़ी हो सकती हैं। इसके अलावा बच्चे की देखभाल करते समय वजन उठाने और बार बार झुकने से भी कमर में दर्द या परेशानी हो सकती है। बच्चे को दूध पिलाते समय अगर पीठ को सही सपोर्ट न मिले तो भी कमर पर दबाव बढ़ सकता है।
नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के मुताबिक, बच्चे की देखभाल के दौरान शरीर की सही मुद्रा का ध्यान रखना जरूरी है। फर्श से कोई चीज उठाते समय कमर से झुकने के बजाय घुटनों को मोड़कर नीचे बैठना चाहिए। बच्चे को उठाते समय भी कमर सीधी रखते हुए घुटनों को मोड़ना बेहतर है। दूध पिलाते समय पीठ को अच्छी तरह सपोर्ट देने से कमर पर पड़ने वाला दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान पेट के बीच की दो मांसपेशियां अलग हो सकती हैं। इसे डायस्टेसिस रेक्टी कहा जाता है। बढ़ते हुए गर्भाशय के कारण इन मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है। आमतौर पर बच्चे के जन्म के करीब 8 हफ्ते तक यह अंतर कम होने लगता है। अगर 8 हफ्ते बाद भी मांसपेशियों के बीच गैप साफ दिखाई दे तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि इससे कमर की समस्या का खतरा बढ़ सकता है।
नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, अगर डिलीवरी के बाद एक पैर की पिंडली यानी काफ मसल में दर्द के साथ सूजन या लालिमा हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह डीप वेन थ्रोम्बोसिस यानी DVT का संकेत हो सकता है। इसके अलावा अगर पैर में दर्द या सूजन के साथ सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी हो तो यह फेफड़ों में खून का थक्का पहुंचने जैसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, बच्चे को दूध पिलाते समय पीठ को सीधा और अच्छी तरह सपोर्ट देकर बैठना चाहिए। कमर के पीछे छोटा तकिया या कुशन रखा जा सकता है। बच्चे को उठाते समय कमर सीधी रखें और घुटनों को मोड़ें।
नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, अगर कमर दर्द कुछ हफ्तों में ठीक नहीं होता, रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं या दर्द लगातार बढ़ रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।