
डायबिटीज से शरीर की इम्युनिटी घट जाती है। इससे वायरस, बैक्टीरिया या फंगस जल्दी नुकसान पहुंचाते हैं। अगर महिला को डायबिटीज है तो उनमें यूरिनरी ट्रैक इंफेक्शन (यूटीआइ) की आशंका अधिक रहती है। यह बैक्टीरिया से होने वाला रोग है। अधिक उम्र की महिलाओं में भी इसकी आशंका रहती है। लंबे समय तक डायबिटीज से ब्लैडर की नसें भी प्रभावित हो सकती हैं। ब्लैडर की मांसपेशियां कमजोर होने से यूरिनरी तंत्र के बीच सिग्नल को प्रभावित कर ब्लैडर को खाली होने से रोक सकती हैं। यूरिन पूरा नहीं निकल सकता है। इससे यूरिन में जलन-दर्द, ज्यादा यूरिन लगना, पेट के निचले हिस्से में दर्द, यूरिन में दुर्गंध या खून भी आ सकता है। इसकी पहचान के लिए यूरिन कल्चर की जरूरत पड़ती है। इसमें आम एंटीबायोटिक्स कम ही असर करती है। डॉक्टर की सलाह से ही कोई दवा लें। कई बार मरीज की दवा लंबे समय तक चलानी पड़ सकती है। इसमें लापरवाही करने से परेशानी गंभीर हो सकती है।