Diabetes Eye Disease: डायबिटीज सिर्फ शरीर के अंगों पर असर नहीं डालती, बल्कि यह आपकी आंखों के लिए भी खतरा बन सकती है। हाल ही में हुए एक स्टडी में बताया गया है कि डायबिटीज से होने वाली आंखों की समस्याओं के 8 शुरुआती लक्षण ऐसे हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Diabetes Eye Disease: डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर को ही नहीं बढ़ाती, बल्कि धीरे-धीरे आपकी आंखों की रोशनी भी छीन सकती है। अक्सर लोग मानते हैं कि नजर कमजोर होना सिर्फ उम्र का असर है, लेकिन सच यह है कि अनकंट्रोल्ड शुगर रेटिना, ब्लड वेसल्स और ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है वह भी चुपचाप और बिना किसी दर्द के।एक हालिया स्टडी में रिसर्चर्स ने ऐसे कई शुरुआती संकेत बताए हैं, जिन्हें अगर समय रहते पहचान लिया जाए, तो आगे होने वाला बड़ा नुकसान रोका जा सकता है।अगर आप भी डायबिटीज से ग्रस्त हैं, तो इन लक्षणों पर खास सतर्क रहें क्योंकि देरी आपकी आंखों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
एक हालिया अध्ययन, जो जर्नल ऑफ नेपाल मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित हुआ, बताता है कि टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में अंधेपन का खतरा काफी अधिक है। उरिसर्च के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि 449 मरीजों में से लगभग 4% लोग पूरी तरह से दृष्टिहीन पाए गए। इसका मुख्य कारण गंभीर डायबिटिक रेटिनोपैथी और मैकुलर ओडिमा था वही समस्याएं जिनके बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार चेतावनी देता रहा है।
रेटिना आंख की वह पतली परत है जो रोशनी पकड़कर हमें साफ देखने में मदद करती है। जब ब्लड शुगर लंबे समय तक हाई रहती है, तो रेटिना की नाज़ुक नसें कमजोर होने लगती हैं, उनमें से पानी या खून लीक होने लगता है और ऑक्सीजन कम पहुंचती है।शुरुआत में डायबिटिक रेटिनोपैथी बिना किसी दर्द या लक्षण के बढ़ती रहती है, लेकिन बाद में आंखों में धुंधलापन, ब्लैक स्पॉट दिखना, अंदर खून बहना और रेटिना में सूजन जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
अच्छी खबर यह है कि डायबिटिक ब्लाइंडनेस अक्सर रोकी जा सकती है, बशर्ते समय रहते जांच और इलाज कराया जाए। ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने से रेटिना को नुकसान का खतरा काफी कम हो जाता है। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और वजन को संतुलित रखना भी उतना ही जरूरी है।
इलाज के विकल्पों में लीक हो रही नसों पर लेजर का उपयोग, सूजन कम करने के लिए एंटी-VEGF इंजेक्शन और गंभीर मामलों में विट्रेक्टॉमी सर्जरी शामिल हैं।अपने खान-पान में हरी सब्जियों, ओमेगा-3 और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर संतुलित आहार शामिल करें। साथ ही नियमित व्यायाम और धूम्रपान से दूरी आंखों को लंबे समय तक सुरक्षित रखते हैं।