
फरवरी 2019 की बात है, हॉस्पिटल में मरीजों को देख रहा था, उस समय जुकाम की शिकायत हुई। छींक आनी शुरू हुई। जब छींकें लगातार बढ़ती गई और गले में भी दिक्कत शुरू हो गई तो स्वाइन फ्लू की आशंका हुई। इसके बाद स्वाइन फ्लू से संबंधित जांचें करवाई तो रिपोर्ट पॉजिटिव निकली तो थोड़ा चिंता हुई। क्योंकि स्वाइन फ्लू के वायरस की फ्रीक्वेंसी तेज होती है। इसलिए तुरंत अन्य वरिष्ठ डॉक्टरों से बातचीत कर ओपिनियन ली।
बिना समय गंवाए इलाज शुरू
पूरी जानकारी के बाद बिना समय गंवाए संबंधित दवाएं लेना शुरू कर दिया। जब परिवार को इसकी जानकारी हुई तो सभी के माथे पर चिंता की लकीरें थी लेकिन उन्हें समझाया कि चिंता की बात नहीं है। उन्हें भरोसा दिलाया कि जल्द ही ठीक हो जाऊंगा। इसके बाद सभी ने सहयोग किया। दूसरे फ्लोर पर एक कमरे में सात दिन तक रह कर जरूरी प्रोटीन, पोषकतत्व से भरपूर आहार व नियमित दवाएं लेना शुरू किया तो करीब एक सप्ताह में बुखार, गले में खरांश आदि कम हुई। करीब एक माह रिकवर करने में लगे। इस तरह की बीमारी में बिना डरे इलाज के साथ बचाव के कदम उठाना चाहिए।