
बच्चों में सर्दी-जुकाम व बुखार के साथ कानों में भी इंफेक्शन हो जाता है। यह 6-7 साल से छोटे बच्चों में अधिक होता है। सर्दी-जुकाम की वजह से मध्य कान में सूजन आ जाती है। जिससे तरल (म्यूकस) कान के अंदर ही जम जाता है। इससे कान में नमी होने लगती है। वहां जीवाणु और विषाणु पनपने लगते हैं। इस कारण से भी बच्चों के कान में इंफेक्शन और दर्द की समस्या हो सकती है।
फेक्शन से मवाद बन जाती है। इससे कान के पर्दे पर दबाव पडऩे लगता है। बच्चे को बुखार भी आ सकता है। इसको एक्यूट ओटाइटिस मीडिया कहते हैं।
यूस्टेकियन ट्यूब में रुकावट
कान की एक नली नाक के पिछले व गले के ऊपरी हिस्से से जुड़ी होती है। इसीलिए साइनस और टॉन्सिल होने पर कान में दर्द और सूजन होती है। यह यूस्टेकियन ट्यूब है। सूजन से यह ट्यूब बंद हो जाती है। कान में मवाद भरने से पर्दे को नुकसान पहुंचता है। मवाद कान के मध्य से गले के पीछे मौजूद यूस्टेकियन ट्यूब तक भर जाती है। तेज दर्द होता है।
बच्चे के कान में न डालें कोई भी लिक्विड
अक्सर जब बच्चों के कान में दर्द होता है तो घरवाले कोई तेल या लिक्विड डाल देते हैं। ऐसा करने से बचें। कई बार इससे राहत मिलने की बजाय नुकसान उठाना पड़ सकता है। अगर यह समस्या रात के समय या ऐसे समय पर हो जब आप चिकित्सक को नहीं दिखा सकते हैं तो किसी विशेषज्ञ की सलाह से बच्चे को पैरासिटामोल दे सकते हैं। इसकी खुराक बच्चे की उम्र के अनुसार नहीं बल्कि उसके वजन के अनुसार दें। फिर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
ऐसे करते इलाज
एसी दिक्कत होने के बाद तुरंत चिकित्सक की सलाह से लेना चाहिए क्योंकि ज्यादा दबाव बढऩे से कान का परदा फट सकता है। कान बहने लगता है। दो हफ्ते से अधिक इंफेक्शन रहता है तो उसे क्रॉनिक इंफेक्शन कहते हैं। यदि दवाएं लेने के दो सप्ताह तक आराम नहीं मिलता तो परदे में छेद कर मवाद निकालते हैं। इसके बाद कान में पानी जाने जुकाम से बचाव करना होता है।