
Dyslexia Symptoms: पढ़ने में मन नहीं लगता, अक्षर उल्टे लिखता है या सुलेख की कॉपी हमेशा गंदी रहती है अक्सर जब बच्चे स्कूल में पढ़ने या लिखने में पिछड़ने लगते हैं, तो माता-पिता और टीचर उन्हें आलसी, कामचोर या कम अक्ल समझ लेते हैं। डांट-फटकार और ट्यूशन का दौर शुरू हो जाता है, लेकिन बच्चे की परफॉर्मेंस फिर भी नहीं सुधरती। अगर आपके या किसी परिचित के बच्चे के साथ ऐसा हो रहा है, तो ठहरिए! ब्रिटिश डिस्लेक्सिया एसोसिएशन (BDA) के मुताबिक, हो सकता है कि बच्चा जानबूझकर ऐसा न कर रहा हो। पढ़ने-लिखने की यह झिझक और परेशानी डिस्लेक्सिया (Dyslexia) नाम की एक स्थिति की वजह से हो सकती है। डिस्लेक्सिया कोई दिमागी बीमारी या पागलपन नहीं है, बल्कि यह दिमाग के काम करने का एक अलग तरीका है। चलिए समझते हैं कि डिस्लेक्सिया आखिर क्या है और इसके संकेतों को कैसे पहचाना जाए।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, डिस्लेक्सिया सीखने और पढ़ने से जुड़ी एक स्थिति (Learning Difficulty) है। इसका बच्चे या बड़े की बुद्धिमत्ता (Intelligence) से कोई लेना-देना नहीं होता। डिस्लेक्सिया से पीड़ित लोग बहुत ही होशियार, क्रिएटिव और तेज दिमाग वाले हो सकते हैं, लेकिन उनका दिमाग शब्दों और अक्षरों को उस तरह प्रोसेस नहीं कर पाता जैसे बाकी लोगों का दिमाग करता है। जब कोई आम व्यक्ति कोई शब्द पढ़ता है, तो उसका दिमाग तुरंत अक्षर की आवाज और उसके मतलब को जोड़ लेता है। लेकिन डिस्लेक्सिया से पीड़ित व्यक्ति के दिमाग को अक्षरों को पहचानने, उनके उच्चारण को समझने और उन्हें सही क्रम में जोड़ने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। जैसे, उन्हें b और d या saw और was में फर्क करने में उलझन हो सकती है।
डिस्लेक्सिया के संकेत उम्र के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। अक्सर जब बच्चा स्कूल जाना शुरू करता है, तब इसके लक्षण ज्यादा साफ दिखाई देने लगते हैं;
डिस्लेक्सिया सिर्फ बचपन तक सीमित नहीं रहता, यह उम्र भर रहता है;
यह जानना बहुत जरूरी है कि डिस्लेक्सिया किसी गलत खान-पान, टीवी देखने या परवरिश की कमी से नहीं होता। यह अक्सर परिवारों में चलता है। अगर माता-पिता या खानदान में किसी को पढ़ने-लिखने में दिक्कत रही है, तो बच्चे में डिस्लेक्सिया होने की संभावना बढ़ जाती है। न्यूरोलॉजिकल रिसर्च बताती है कि डिस्लेक्सिया से पीड़ित लोगों के दिमाग का वह हिस्सा अलग तरीके से काम करता है जो भाषा को समझने और पढ़ने का काम करता है।
डिस्लेक्सिया कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसकी कोई गोली या दवा आती हो। लेकिन सही गाइडेंस और सपोर्ट से ऐसे बच्चे लाइफ में बहुत आगे बढ़ सकते हैं;