भारत के महानगरों में बैक्टीरिया तेजी से एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर रहे हैं। सीसीएमबी के अध्ययन में सीवर नमूनों के जरिए एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खुलासा हुआ, जो भविष्य में इलाज को और चुनौतीपूर्ण बना सकता है।
भारत के बड़े महानगरों में रहने वाले लोगों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा तेजी से उभर रहा है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि शहरों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया अब एंटीबायोटिक दवाओं के खिलाफ तेजी से खुद को मजबूत बना रहे हैं। यह शोध सीएसआईआर-सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) द्वारा किया गया है, जिसने देश में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को लेकर एक नई चिंता पैदा कर दी है।
इस अध्ययन के तहत वैज्ञानिकों ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों के 19 अलग-अलग स्थानों से सीवर के पानी के कुल 447 नमूने एकत्र किए। इन नमूनों के विश्लेषण के आधार पर भारत का पहला व्यापक एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस मैप तैयार किया गया। यह मैप इस बात की स्पष्ट तस्वीर देता है कि किस तरह बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर रहे हैं और यह समस्या कितनी तेजी से फैल रही है।
सीसीएमबी के निदेशक डॉ. विनय के. नंदिकूरी के अनुसार, पारंपरिक लैब परीक्षणों के माध्यम से इस तरह के सूक्ष्म बदलावों को पहचान पाना मुश्किल था। इसलिए इस शोध में ‘शॉटगन मेटाजेनोमिक्स’ नामक उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया, जिससे बैक्टीरिया के जीन स्तर पर होने वाले परिवर्तनों को विस्तार से समझा जा सका। इस तकनीक ने यह स्पष्ट किया कि बैक्टीरिया केवल जीवित रहने के लिए ही नहीं, बल्कि दवाओं को निष्क्रिय करने के लिए भी खुद को ढाल रहे हैं। ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, बैक्टीरिया विशेष प्रकार के जीन विकसित कर रहे हैं, जो उन्हें एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव से बचाते हैं। कुछ जीन बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति को इतना मजबूत बना देते हैं कि दवाएं उसे भेद नहीं पातीं। वहीं कुछ बैक्टीरिया ऐसे एंजाइम बनाते हैं जो दवाओं के अणुओं को नष्ट कर देते हैं या उन्हें कोशिका से बाहर निकाल देते हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये बैक्टीरिया अपने इन प्रतिरोधी जीनों को न केवल अपनी अगली पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं, बल्कि अन्य बैक्टीरिया के साथ भी साझा कर रहे हैं। इससे यह खतरा और बढ़ जाता है, क्योंकि एक बार यह क्षमता फैलने पर कई प्रकार के बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बन सकते हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि भले ही अलग-अलग शहरों में अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरिया अधिक सक्रिय हों, जैसे चेन्नई और मुंबई में ‘क्लेबसिएला’ तथा कोलकाता में ‘स्यूडोमोनास’ लेकिन इन सभी का एंटीबायोटिक से लड़ने का तरीका लगभग समान है। यह संकेत देता है कि समस्या स्थानीय नहीं, बल्कि व्यापक और व्यवस्थित रूप से फैल रही है।