
Epidermolysis Bullosa Symptoms: सोचिए, अगर किसी बच्चे की त्वचा इतनी नाजुक हो कि उसे प्यार से गले लगाने, गोदी में उठाने या कपड़ों की सिलाई चुभने से भी शरीर पर छाले पड़ जाएं? सुनने में ही कितना दर्दनाक लगता है न, लेकिन एपिडर्मोलिसिस बुलोसा (EB) नाम की बीमारी में ऐसा सच में होता है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की स्किन किसी तितली के पंखों जैसी कमजोर हो जाती है, इसीलिए इसे बटरफ्लाई स्किन भी कहते हैं। आइए एनएचएस से समझते हैं कि आखिर यह बीमारी होती क्यों है और इसके क्या लक्षण हैं।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, हमारी त्वचा (स्किन) कई परतों से मिलकर बनी होती है। इन परतों को आपस में जोड़े रखने के लिए हमारे शरीर में एक खास तरह का प्रोटीन होता है, जो एक तरह से गोंद (फेविकोल) का काम करता है। यही गोंद हमारी स्किन को मजबूती देता है। लेकिन इस बीमारी में ऐसा नहीं हो पाता।
यह एक जेनेटिक (आनुवंशिक) बीमारी है, जो बच्चे को माता-पिता के जींस के जरिए मिलती है। इस बीमारी के चलते बच्चे के शरीर में वो जरूरी प्रोटीन या गोंद बन ही नहीं पाता। नतीजा यह होता है कि स्किन की परतें बहुत कमजोर हो जाती हैं और जरा सी भी रगड़ या दबाव पड़ते ही अलग हो जाती हैं, जिससे वहां पानी वाले बड़े-बड़े छाले बन जाते हैं।
इस बीमारी के लक्षण बच्चे के पैदा होने के तुरंत बाद या कुछ ही महीनों में दिखने लगते हैं। आपको ये चीजें देखने को मिल सकती हैं:
अभी तक इस बीमारी को जड़ से खत्म करने का कोई पक्का इलाज नहीं मिला है। लेकिन सही देखभाल से बच्चे की तकलीफ को काफी कम किया जा सकता है। सबसे जरूरी होता है बच्चे को छालों और इन्फेक्शन से बचाना। इसके लिए डॉक्टर की सलाह पर खास तरह की पट्टियां बांधी जाती हैं, बच्चों को एकदम ढीले और मखमली-मुलायम कपड़े पहनाए जाते हैं, ताकि उन्हें कम से कम दर्द हो।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।