क्या आपको भी होती है भोजन निगलने में दिक्कत। यदि आपकी इम्युनिटी कम है या फिर आप इंहेलर का प्रयोग करते हैं तो सतर्क रहें?
100 में से 50 प्रतिशत बीमारियां ऐसी हैं जो बैक्टीरियल, वायरल व फंगल अटैक से जन्म लेती हैं। इनमें से फंगल इंफेक्शन के मामले ज्यादातर त्वचा संबंधी रोगों में सामने आते हैं लेकिन कई बार भोजन नली में भी फंगल इंफेक्शन हो जाता है। ऐसे में मरीज को भोजन निगलने और गले में अटकने जैसा महसूस होता है। असल में ऐसे लोग जिनकी इम्युनिटी जरूरत से ज्यादा कम है उनमें इस रोग की आशंका बढ़ जाती है। जानें इस बारे में-
इस इसोफीगल कैंडिडाइटिस (Esophageal Candidiasis) नामक बीमारी में मरीज को भोजन निगलने में दिक्कत होने के साथ ही चीजें बेस्वाद लगने, हल्का बुखार आने, गले में असहज महसूस करने, आवाज में हल्का सा बदलाव और कई बार गले व सीने में दर्द का अहसास होने जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।
इसोफीगल कैंडिडाइटिस की समस्या क्या है?
जवाब : मानव शरीर में त्वचा, मुंह, गला व आंतों में सामान्यत: फंगस मौजूद होते हैं जिनसे किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं होती। कैंडिडा प्रजाति के फंगस की संख्या अधिक होने से यह शरीर में अटैक करने लगता है। यह जब भोजन नली पर आघात करते हैं तो स्थिति इसोफीगल थ्रश कहलाती है। मेडिकली इसे इसोफीगल कैंडिडाइटिस भी कहते हैं।
किन लोगों में इस रोग की आशंका अधिक होती है?
जवाब : ऐसे लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम होती है उनमें इसका रिस्क ज्यादा होता है। बुजुर्गों में, डायबिटीज रोगी, एड्स या एचआइवी और कैंसर के इलाज के लिए जिनकी कीमोथैरेपी चल रही होती है उनमें इसकी आशंका अधिक होती है। इसके अलावा कुछ मामलों में यह रोग बच्चों में भी पाया जाता है।
किस तरह करते हैं समस्या की पहचान?
जवाब : मरीज का फिजिकल एग्जामिनेशन करने के बाद उसकी हिस्ट्री पर गौर किया जाता है। इसमें खासतौर पर उसकी उम्र, किसी अन्य रोग से पीडि़त तो नहीं या उसके लिए कोई दवा तो नहीं चल रही है। इससे संबंधित जांचों के अलावा एंडोस्कोपी टेस्ट से भी समस्या का पता चलता है। बेहद कम मामले ही होते हैं जिनमें सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
इलाज के दौरान किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?
जवाब : इलाज के दौरान या बाद में भी कुछ सावधानियों को बरतना जरूरी होता है। कई बार लेटने पर भोजन नली में भारीपन महसूस होता है। इसलिए लेटते वक्त सिर के नीचे तकिया लगाएं। पर्याप्त आराम करें और गरिष्ठ भोजन के बजाय हल्की फुल्की चीजें खाएं।
किन कारणों से यह समस्या तेजी से बढऩे लगती है?
जवाब : अस्थमा रोगियों में इस्तेमाल होने वाले सामान्य और रोटाकैप इंहेलर के प्रयोग से फंगस तेजी से भोजन नली में फैलते हैं। बेहद कम मामलों में यह डायजेस्टिव ट्रैक्ट तक पहुंचते हैं।
इसोफीगल थ्रश का इलाज किस तरह से करते हैं?
जवाब : मरीज की स्थिति और गंभीरता के अनुसार एंटीफंगल दवाएं कम से कम दो हफ्ते तक दी जाती हैं। इसके तहत ध्यान रखते हैं कि फंगस की संख्या खत्म हो व यह अन्य अंगों में फैले नहीं। साथ में फंगल इंफेक्शन के कारण गले पर आई सूजन को कम करने के लिए भी दवाएं दी जाती है। गले पर दबाव न पड़े इसलिए मरीज को कम बोलने की सलाह देते हैं।
एक्सपर्ट :डॉ. सुमित रूंगटा, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट, केजीएम यूनिवर्सिटी, लखनऊ