न्यूयॉर्क में एक व्यक्ति की औसत आयु करीब 81 साल है। लेकिन इसी शहर में कोलंबिया एजिंग सेंटर में वृद्ध और बुजुर्ग न केवल भरपूर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं बल्कि वे लोगों को यह संदेश भी दे रहे हैं कि जीवन में अगर कुछ निश्चित लक्ष्य हों तो व्यक्ति को काम करते रहने की ऊर्जा मिलती है जो उसे स्वस्थ और खुश रखता है।

सिल्विया लास लोग्स रोज सुबह अपनी फिटबिट फिटनेस वॉकर ऐप की मदद से कुछ हजार कदम चलती हैं जो उनकी नियमित दिनचर्या है। ऐसे ही फ्लोरेंस ली अक्सर वीकेंड्स पर क्वींस शहर से मैनहट्टन तक खुद ड्राइव कर ऑर्केस्ट्रा सुनने एवं शाम बिताने आती हैं। लैरी व्हाइट बीते 10 सालों से न्यूयॉर्क आ रहे हैं। वे यहां जेल के कैदियों को प्रभावी संवाद का प्रशिक्षण देते हैं और उनकी काउंसलिंग में मदद करते हैं। लोग्स, ली और व्हाइट में बहुत सी बातें समान हैं। तीनों ही 81 साल की उम्र पार कर चुके हैं, तीनों ही इस उम्र में भी सक्रिय हैं और तीनों ही अपने शौक या किसी खास मकसद से लोगों से जुड़े हुए हैं। कोलंबिया विश्वविद्यालय के एक्सपर्टिंग एक्सपैक्टेशंस प्रोजेक्ट्स के निदेशक डोरियन ब्लॉक कहते हैं कि न्यूयॉर्क शहर में बुजुर्गों की जीवन प्रत्याशा बढ़ाने के लिए बहुत कुछ है। यहां बुजुर्गों के लिए खास पार्क हैं, जीवंत सांस्कृतिक विरासत है, कहीं आने-जाने के लिए खुद गाड़ी चलाने की जरुरत नहीं है यातायात नेटवर्क से कहीं भी आ जा सकते हैं और सुलभ चिकित्सा सुविधा के चलते बुजुर्गों का जीवन आसान है। डोरियन ने शहर के 20 बुजुर्गों के जीवन को दो साल तक ट्रैक किया ताकि यहां के बुजुर्गों की खुशी का राज जान सकें। अपने शोध में डोरियन को बुजुर्गों के अच्छे स्वास्थ्य और खुश मिजाज रहने के कई महत्त्वपूर्ण सबक मिले। अच्छी बात सह है कि इनका अनुसरण कर कोई भी आसानी से खुशहाल जीवन जी सकता है।
01. एक लक्ष्य अवश्य रखें- जीवन में लक्ष्य हो तो हमें सुबह उठने का एक ठोस कारण मिल जाता है। ८४ साल की लोग्स अब भी पार्ट टाइम मानसिक काउंसलर का काम करती हैं। उनका कहना है कि अगर आपके जीवन में कोई विशेष लक्ष्य नहीं है तो आप एक ही जगह बैठे-बैठे अपने आखिरी समय के इंतजार में कुढ़ते रहते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम कोई न कोई लक्ष्य हमेशा रखें।
02. सामाजिक मेल-मिलाप- अपनी बीती जिंदगी का जश्न मनाएं और सामाजिक संबंधों को मजबूत करते रहें। सैंडी और आर्ट रॉबिंस 83 और 89 साल के हैं। दोनों मैनहट्टन में एक थिएटर कंपनी चलाते हैं। अक्सर दोनों अपने साथियों के साथ एक साथ खाना खाते हुए विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
03. अवरोधों को हावी न होने दें- 87 साल की जैकी मर्डोक दिव्यांग हैं। आंखों की रोशनी न होने के बावजूद वे एक पेशेवर डांसर हैं। हाल ही उन्हें केंसर के बारे में भी पता चला। लेकिन इसने उनकी जिंदगी में बहुत ज्यादा असर नहीं डाला। वे कहती हें कि अपने सपनों के रासतों में आने वाले अवरोधों से हारकर बैठने अच्छा है उनका सामना करते हुए रोज अपनी जिंदगी को जोश के साथ जीना। वे आज भी अपने फैशन ब्लॉग पर सक्रिय हैं और शौकिया बुजुर्गों को डांस सिखाती हैं।
04. पैसा ही सबकुछ नहीं है- जीवन में एक वक्त के बाद पैसा उतना महत्वपूर्ण नहीं रह जाता जितना आज हम मानते हैं। डोरियन ब्लॉक का कहना है कि मुझे बहुत आश्चर्य हुआ जब मैंने देखा कि लोगों की अपने जीवन और दिनचर्या से होने वाली संतुष्टि पर इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे किस वर्ग और आय स्तर से जुड़ हुए हैं। बल्कि जीवन के बारे में सबसे सुंदर और सकारात्मक विचार उन्हीं लोगों से मिले जिनकी आय सबसे कम थी।
05. सच्चाई को स्वीकार करें- बुढ़ापे में अक्सर हम अकेले ही रह जाते हैं, इस वासतविकता को स्वीकार लेने से हम बहुत से तनाव और दुखों से खुद को बचा सकते हैं। 83 वर्षीय लैरी व्हाइट ने 32 साल जेल में बिताए हैं। लैरी का कहना है कि उम्र के पड़ाव पर व्यक्ति के निकट संबंधी और दोस्तों की मृत्यु हो जाती है या वे अन्य शहरों में बच्चों के पास रहने चले जाते हैं इससे उनमें ज्यादा खालीपन आ जाता है। बड़े पैमाने पर हमारी संस्कृति में बुजुर्गों की सामाजिक स्थिति के बारे में युवाओं से चर्चा न करना भी इस परिस्थिति के लिए एक बड़ी वजह है। इसलिए बुजुर्गों के लिए सामाजिक जुड़ाव और अधिक हो जाता है।
06. एक रुटीन जरूर बनाएं- बुजुर्गों को अपनी एक नियमित दिनचर्या जरूर बनानी चाहिए। रुटीन हैल्थ चेकअप, दोस्तों से मिला, घूमना-फिरना और शौकिया गतिविधि के लिए समय निकालने से वक्त काटना आसान हो जाता है। रुटीन होना इस बात का संकेत है कि आप जानते हैं कि आपको क्या करना है।
07. मृत्यु ठहराव है अंत नहीं- बुजुर्गों ने कहा कि मृत्यु से डर भी हमारे जीवन को सीमा में बांध देता है। युवा मृत्यु के बारे में बात करने से भी डरते हैं। जबकि 80 साल के बुजुर्ग के लिए यह एक अटल सच्चाई है। हम सभी ने अपना जीवन भरपूर जिया है और मृत्यु का आलिंगन करने को तैयार हैं। मर्डोक ने अपने लिए एक खास पोशाक भी चुन रखी है जिसमें वे अपनी अंतिम यात्रा करना चाहती हैं। कोलंबिया अध्ययन का कहना है कि उम्र बढऩे की धारणा हमारी अपनी सोच के साथ ही शुरू होता है।
हर बार जब हम खुद से कहते हैं कि हम बूढ़े हो गए हैं तो यह अपने बारे में की गई एक भविष्यवाणी बन जाती है। दूसरे शब्दों में, युवा और बूढ़े लोगों के बारे में जो हमारी धारणा ही सबकुछ है। मसलन हम खुद ही तय कर लेते हें कि यह बुजुर्गों से नहीं हो पाएगा और युवा इस काम को नहीं कर सकते। यह महज हमारी अपनी सोच का दायरा है जो हमारी क्षमताओं को सीमित कर देता है।