Fasting Blood Sugar Range: अक्सर लोग घबरा जाते हैं जब उनकी खाली पेट वाली शुगर (Fasting Glucose) 126 mg/dL से ऊपर आती है, क्योंकि इसे डायबिटीज का लेवल माना जाता है। लेकिन, सिर्फ एक टेस्ट के आधार पर डॉक्टर आपको शुगर का मरीज घोषित नहीं करते। इसके पीछे कई बड़े कारण होते हैं, जिसे डॉ. संदीप जोशी ने समझाया है।
Fasting Blood Sugar Range: अधिकतर लोग घर पर या लैब में शुगर चेक कराते हैं और अगर रीडिंग 126 से ऊपर आ जाए, तो जान हलक में आ जाती है। हमें लगता है बस अब तो डायबिटीज हो गई! लेकिन जब हम डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वो कहते हैं, घबराओ मत, अभी आपको डायबिटीज नहीं है। अब आप सोचेंगे कि डॉक्टर ऐसा क्यों कह रहे हैं?
डॉक्टर संदीप जोशी ( MD, फिजिशियन) ने पत्रिका के साथ बातचीत में इसे आसान भाषा में समझाया है-
Healthline के अनुसार, डॉक्टर सिर्फ एक बार की रिपोर्ट देखकर फैसला नहीं लेते। हो सकता है जिस दिन आपने टेस्ट कराया, उस रात आपने बहुत भारी खाना खाया हो या आपकी नींद पूरी न हुई हो। शरीर में शुगर का लेवल ऊपर-नीचे होता रहता है। इसलिए, डॉक्टर हमेशा टेस्ट को दोबारा दोहराने (Repeat Test) की सलाह देते हैं।
खाली पेट वाली शुगर तो सिर्फ उस पल की जानकारी देती है। डॉक्टर असली फैसला HbA1c टेस्ट देखकर करते हैं। यह टेस्ट आपके पिछले 3 महीनों का औसत शुगर लेवल बताता है। अगर फास्टिंग ज्यादा है लेकिन HbA1c नॉर्मल (5.7% से कम) है, तो इसका मतलब है कि आपको अभी डायबिटीज नहीं हुई है।
अगर आप टेस्ट वाले दिन बहुत तनाव में थे, या आपको सर्दी-खांसी या कोई और इन्फेक्शन था, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। ये हार्मोन बिना बात के शुगर लेवल को बढ़ा देते हैं। इसे टेंपरेरी स्पाइक (Temporary Spike) कहते हैं, डायबिटीज नहीं।
कई बार लैब में सैंपल सही से प्रोसेस नहीं होता या घर वाली ग्लूकोमीटर मशीन की बैटरी लो होने पर रीडिंग गलत आ सकती है। डॉक्टर इन सब बातों को ध्यान में रखकर ही आपको दवा शुरू करने या न करने की सलाह देते हैं।
हो सकता है आप उस बॉर्डर पर हों जहां शुगर बढ़ना शुरू हुई है (100 से 125 के बीच)। इसे प्रीडायबिटीज कहते हैं। इस स्टेज पर डॉक्टर आपको बीमार नहीं मानते, बल्कि चेतावनी देते हैं कि अपनी डाइट और लाइफस्टाइल सुधार लो ताकि आगे चलकर यह बीमारी न बने।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।