स्वास्थ्य

Fasting Sleepiness: व्रत में बार-बार नींद क्यों आती है, साइंसडायरेक्ट और हेल्थलाइन से जानिए इसके कारण व थकान दूर करने के उपाय

Fasting Sleepiness: उपवास के दौरान अक्सर सुस्ती, थकान और बार-बार नींद आने की समस्या होती है। साइंसडायरेक्ट, हेल्थलाइन और क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार जानिए इसके पीछे की वैज्ञानिक वजहें और एक्टिव रहने के तरीके।
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Oct 14, 2026
व्रत के दौरान सुस्ती और थकान महसूस करती हुई महिला
उपवास में खान-पान में बदलाव और पर्याप्त पानी न पीने से शरीर सुस्त पड़ने लगता है, जिससे दिनभर नींद आती है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Gemini)

Fasting Sleepiness: आपने कभी गौर किया है कि अक्सर लोग व्रत के दौरान शिकायत करते हैं कि उनको बहुत ज्यादा नींद आती है। रात को पूरी नींद लेने के बाद भी उनको दिनभर थकान और सुस्ती बनी रहती है, यहां तक कि लोग दिन में सोने के बाद भी ऐसा ही महसूस करते हैं। हम लोग सोचते हैं कि ऐसा सिर्फ भूखे रहने की वजह से हो रहा है, लेकिन साइंसडायरेक्ट के मुताबिक इसके पीछे कई शारीरिक और मेटाबॉलिक कारण होते हैं। जब हम अचानक भोजन की मात्रा कम करते हैं या खाने की टाइमिंग बदलते हैं, तो हमारा शरीर इस बदलाव के साथ तालमेल बिठाने में थोड़ा वक्त लेता है। आइए समझते हैं कि व्रत में बार-बार नींद आने की असली वजहें क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।

ब्लड शुगर लेवल का अचानक गिरना (Low Blood Sugar)

जब आप कई घंटों तक कुछ नहीं खाते या बहुत कम खाते हैं, तो खून में ग्लूकोज (ब्लड शुगर) का स्तर घटने लगता है। ग्लूकोज हमारे दिमाग और शरीर को तुरंत ऊर्जा देने वाला मुख्य ईंधन है। जब दिमाग को पर्याप्त ग्लूकोज नहीं मिलता, तो वह एनर्जी बचाने के लिए शरीर को आराम करने का सिग्नल देता है। इसी वजह से हमें सुस्ती, चक्कर और नींद का अहसास होने लगता है।

डिहाइड्रेशन और पानी की कमी

हेल्थलाइन के अनुसार, व्रत में अक्सर लोग पानी पीना भूल जाते हैं या बहुत कम पानी पीते हैं। जब शरीर में पानी का स्तर कम होता है, तो ब्लड सर्कुलेशन धीमा पड़ जाता है और ऑक्सीजन सही तरीके से दिमाग तक नहीं पहुंच पाती। शरीर में डिहाइड्रेशन का सबसे पहला लक्षण ही थकान, सिरदर्द और भारी नींद आना होता है।

कैलोरी की कमी और मेटाबॉलिज्म का धीमा होना

जब हम उपवास रखते हैं, तो शरीर को रोज मिलने वाली कैलोरी अचानक बहुत कम हो जाती है। ऐसे में शरीर अपने आप को 'ऊर्जा बचत मोड' (Energy Saving Mode) में डाल लेता है। कैलोरी न मिलने के कारण मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ता है, जिससे आप पूरे दिन थका-थका और बेजान महसूस करते हैं।

नींद के हार्मोन और शरीर की जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) में बदलाव

क्लीवलैंड क्लिनिक का कहना है कि जब हम अपने खाने का समय बदलते हैं, तो हमारे सोने-जागने के चक्र (सर्कैडियन रिदम) पर भी इसका असर पड़ता है। खाली पेट होने या डाइट अचानक बदलने से शरीर में कोर्टिसोल और मेलाटोनिन जैसे हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे दिन के वक्त सुस्ती और रात में सही नींद न आने जैसी समस्या होती है।

भारी और मीठा फलाहार खाना

कई लोग व्रत में तली-भुनी चीजें जैसे आलू की पकौड़ियां, कुट्टू के पराठे या ज्यादा चीनी वाली मिठाइयां खा लेते हैं। इस तरह का खाना पचने में बहुत ज्यादा समय लेता है। भारी भोजन पचाने के लिए शरीर सारा खून पेट की तरफ भेज देता है, जिससे दिमाग तक ब्लड फ्लो कम होता है और खाना खाते ही तेज नींद आने लगती है।

Fasting Sleepiness

व्रत के दौरान एक्टिव रहने के लिए क्या करें?

  • पर्याप्त पानी पीएं।
  • थोड़ा-थोड़ा करके खाएं।
  • चाय-कॉफी सीमित रखें।
  • रात को पूरी नींद लें।
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
14 Oct 2026 12:08 pm
Published on:
14 Oct 2026 12:08 pm