How to prevent heart attack : हार्ट अटैक को पहले बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था। पिछले कुछ वर्षों में न केवल सामान्य युवाओं बल्कि कई सेलेब्रेटी जैसे कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव, प्लेबैक सिंगर केके और सिद्धार्थ शुक्ला आदि के अचानक से डेथ हुई है। अगर बात करें कि अचानक होने डेथ की तो कई ऐसे लोग हैं जो संयमित दिनचर्या जीते थे और फिटनेस को लेकर ध्यान भी देते थे। हमने इसकी वजह जानने के लिए बात कि जयपुर के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत चतुर्वेदी से.
Heart attack symptoms : आजकल के दौर में, जब हम स्वस्थ जीवन जीने के बारे में सोचते हैं, तो दिल से जुड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। हालांकि, 30-40 साल के युवाओं में हार्ट अटैक (Heart Attack) की घटनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही है। पिछले कुछ वर्षों में, आपने देखा होगा कि जिम में कसरत करते हुए, सड़क पर दौड़ते हुए, या रेस्टोरेंट में खाना खाते हुए लोगों को अचानक हार्ट अटैक का सामना करना पड़ रहा है। क्यों युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों में इतनी बढ़ोतरी क्यों हो रही है?
Increasing cases of heart attacks among youth : युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों के पीछे मुख्य वजह उनकी अनहेल्दी लाइफस्टाइल है। खराब खानपान, सोने और जागने की अनियमित आदतें, और शारीरिक गतिविधियों की कमी इन समस्याओं को और बढ़ा रही हैं। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत चतुर्वेदी के अनुसार, बड़े शहरों में रहने वाले युवाओं को खासतौर पर इस तरह की समस्याएं अधिक होती हैं। वे अक्सर जंक फूड का सेवन करते हैं, समय नहीं मिल पाने के कारण व्यायाम नहीं करते और इसी वजह से मोटापा, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जो हार्ट अटैक का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा, धूम्रपान और शराब का सेवन भी हार्ट डिजीज के मामलों को बढ़ाता है। कई युवा अब ई-सिगरेट का भी सेवन कर रहे हैं, जो उतना ही खतरनाक है।
1- लगातार तनाव से शरीर में रोगों से लडऩे वाली रक्त की श्वेत कोशिकाओं का उत्पादन काफी तेज हो जाता है। इनके बहुत अधिक मात्रा में होने से शरीर को नुकसान पहुंच सकता हैं। अतिरिक्त कोशिकाएं रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी दीवार में चिपक जाती हैं और खून के प्रवाह को रोकती हैं। इसकी वजह से खून के थक्का बनने लगते हैं। थक्कों से खून के बहाव में तो रूकावट आती ही है साथ ही ये शरीर के दूसरे हिस्सों में भी चले जाते हैं। हार्ट अटैक ((Heart Attack) हो जाता है।
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2- लगातार स्ट्रेस से एड्रेनलिन और कॉर्टिसॉल का बार-बार ज्यादा रिलीज होना ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल आदि को बुरी तरह प्रभावित करता है, इससे दिल में पंप होने वाले खून व उसे पहुंचने वाली ऑक्सीजन की मात्रा प्रभावित होती है। इस दबाव के पडऩे से दिल की नव्र्स या तो बहुत ढीली पड़ जाती हैं या फिर कडक़ हो जाती हैं जिससे हार्ट अटैक (Heart Attack) और हार्ट फेलियर हो सकता है।
दो-चार दिन कम नींद से समस्या नहीं होती है लेकिन चिड़चिड़ापन आदि हो सकता है। दिनचर्या प्रभावित होती है लेकिन लंबे समय या आदत में शामिल होने के बाद सेहत को नुकसान पहुंचने लगता है। कई शोधों में स्पष्ट हो चुका है कि नींद की कमी से शरीर में हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं। इससे मोटापा, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और दिल की बीमारियां जैसी समस्याएं होने लगती हैं जो हार्ट अटैक (Heart Attack) का खतरा बढ़ता है। एक अन्य शोध में कहा गया है कि जो लोग रात में 6 घंटे से कम सोते हैं उनमें हार्ट अटैक होने का खतरा अधिक होता है।
जो हम खाते हैं, कितना खाते हैं और किस समय खाते हैं इसका भी शरीर पर असर पड़ता है। जैसे टीवी देखते हुए जंक और फास्ट फूड खाना ज्यादा नुकसान करता है। इस समय हमें न चाहते हुए ज्यादा खा लेते हैं। बाहरी और बाजार में बिकने वाले फूड आइट्स में रिफाइंड आटा, शुगर, नमक और प्रिजरवेटिव जैसी चीजें ज्यादा होती हैं। इनसे सीधे हार्ट अटैक (Heart Attack) का खतरा बढ़ता है।
दूसरी बात फास्ट फूड खाने से भारतीय पारंपरिक भोजन से भी दूर होते जा रहे हैं। इनमें विटामिन डी, सूक्ष्म पोषक तत्वों की अधिक होती है। भारतीय भोजन में एंटीऑक्सीडेंट्स मात्रा भी बहुत अधिक होती हैं। ये भी दिल की बीमारियों के जोखिम को भी कम करते हैं। इनके लिए हरी सब्जियां, सूखे मेवे जैसे अखरोट, बादाम, मछली, अलसी के बीज और हरी सब्जियां आदि होते हैं। अधिकतर जंक फूड में इनको शामिल नहीं किया जाता है और अगर जाता भी है तो उन्हें ऐसे बनाया जाता है कि उनकी पौष्टिकता ही नष्ट हो जाती है।
लंबे समय तक सीटिंग जॉब, ज्यादा समय तक सोफे पर बैठे रहना आदि भी दिल के लिहाज से सही नहीं होता है। कई ऐेसे शोध बताते हैं कि 20-30 मिनट तक एक ही जगह बैठने से शरीर का मेटाबोजिल्म का स्तर घटने लगता है। इससे शरीर में पाचन क्रिया सुस्त पड़ जाती है और मोटापा और दूसरी क्रॉनिक बीमारियों का आशंका बढऩे लगती है। इसलिए हर आधे घंटे में एक बार थोड़ी दूर चहलकदमी करने की बात की जाती है। दिनचर्या में छोटी-छोटी बदलाव से भी फिजिकली फिट रह सकते हैं जैसे थोड़ी दूर बाजार पैदल या साइकिल से जाएं। लिफ्ट को नो कहें, सीढ़ी से जाएं। नियमित रूप से 45-50 मिनट हल्के व्यायाम करें।
मध्य युवावस्था में जिन्हें पहले हार्ट अटैक हो चुका है या कार्डियोमायोपैथी यानी हार्ट की मसल्स की कमजोरी होती है या हार्ट अटैक होने के जरूरी रिस्क फैक्टर जैसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, ज्यादा कोलेस्ट्रॉल, स्मोकिंग, मोटापा आदि हो। ऐसे लोगो में जो कि आम तौर पर गतिहीन जिंदगी जीते हैं, अगर वो अचानक से अत्यधिक या माध्यम स्तर की भी एक्सरसाइज चालू कर दें तो उनके हार्ट की ब्लड वेसल में कोलेस्ट्रॉल का थक्का अचानक फट सकता है एवम हार्ट अटैक हो सकता है।
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केस एक- एक युवा जो कि क्रिकेटर था और उसकी उम्र महज 25 वर्ष थी। एक दिन क्रिकेट खेलकर आया और शाम को सीने में दर्द की समस्या हुई। हॉस्पिटल ले जाते ही रास्ते में दम तोड़ दिया। डॉक्टर ने बताया कि हार्ट अटैक से डेथ हुई थी।
केस दो- हाल ही सोशल मीडिया पर कई ऐसे युवाओं की डेथ के वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें या तो डांस कर रहे थे या कहीं आ जा रहे हैं। कुछ वीडियो में एक्सरसाइज करते हुए लोगों की अचानक डेथ हुई है।
हार्ट अटैक के दौरान कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जिन्हें पहचानकर समय रहते इलाज करवाया जा सकता है। इन लक्षणों में शामिल हैं:
सीने में दर्द: यह सबसे सामान्य लक्षण है, जो दबाव, जकड़न या जलन के रूप में महसूस हो सकता है।
सांस लेने में तकलीफ: हार्ट अटैक के दौरान सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, और ऐसा महसूस होता है कि सांस फूल रही हो।
बांहों, गर्दन या जबड़े में दर्द: यह दर्द कभी-कभी हार्ट अटैक के दौरान इन क्षेत्रों में महसूस हो सकता है।
चक्कर या बेहोशी: दिल का दौरा पड़ने से ब्लड प्रेशर कम हो सकता है, जिससे चक्कर या बेहोशी आ सकती है।
तेज पसीना आना: हार्ट अटैक के दौरान शरीर में तेज पसीना आना एक सामान्य लक्षण है।
जी मिचलाना या उल्टी: कुछ मामलों में, हार्ट अटैक के साथ जी मिचलाना या उल्टी भी हो सकती है।
डॉ. हेमंत चतुर्वेदी कहते हैं कि युवाओं में दिल के दौरे के लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं, जैसे अत्यधिक थकान, सांस में कमी, तेज या अनियमित दिल की धड़कन, सूजन और बिना कारण वजन बढ़ना। इसलिए, इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए