
Heart Disease Risk Factors: अगर वजन सामान्य है, कोई बीमारी नजर नहीं आती और हाल की कुछ जांचों की रिपोर्ट भी सामान्य आई है, तो ऐसे में लगता है कि दिल की सेहत बिल्कुल ठीक है। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। सिर्फ वजन, ब्लड शुगर या कोलेस्ट्रॉल की किसी एक जांच से दिल की बीमारी के पूरे जोखिम का पता नहीं लगाया जा सकता है। अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के पति कार्डियोवास्कुलर सर्जन डॉ. श्रीराम नेने ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में इससे जुड़ी बातें शेयर की हैं। आइए जानते हैं, किन चीजों को एक साथ ध्यान में रखना जरूरी है।
सिर्फ वजन सामान्य होने का मतलब यह नहीं है कि शरीर में चर्बी का वितरण भी स्वस्थ है। बीएमआई शरीर के वजन और लंबाई के आधार पर एक अनुमान देता है, लेकिन यह शरीर में चर्बी कहां जमा है, इसकी पूरी जानकारी नहीं देता। खासकर पेट के आसपास और आंतरिक अंगों के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों से संबंधित हो सकती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) के अनुसार, बीएमआई के साथ कमर का घेरा भी शरीर में चर्बी के वितरण और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को समझने में मदद कर सकता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति का वजन सामान्य है, लेकिन पेट या कमर के आसपास चर्बी अधिक है, तो केवल वजन देखकर हृदय संबंधी जोखिम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बीएमआई सामान्य होने के बावजूद कमर के आसपास अधिक चर्बी होना एक अलग जोखिम संकेत हो सकता है। इसलिए केवल बीएमआई देखकर शरीर में चर्बी के वितरण और उससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की पूरी तस्वीर समझना मुश्किल हो सकता है।
एक बार की ब्लड शुगर जांच उस समय शरीर में मौजूद शुगर के स्तर की जानकारी देती है। लेकिन ब्लड शुगर का स्तर समय के साथ बदलता रहता है। वहीं, एचबीए1सी पिछले लगभग तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर का अंदाजा देता है। इसलिए सिर्फ एक सामान्य ब्लड शुगर रिपोर्ट के आधार पर लंबे समय में ब्लड शुगर की स्थिति की पूरी तस्वीर नहीं समझी जा सकती। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, एचबीए1सी जांच लंबे समय के औसत ब्लड शुगर को समझने में मदद करती है।
उच्च रक्तचाप दिल की बीमारी के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। समस्या यह है कि कई लोगों में बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर होने के बावजूद कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति खुद को बिल्कुल सामान्य महसूस कर सकता है, लेकिन उसका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ हो सकता है। इसलिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच करना महत्वपूर्ण है।
सिर्फ कुल कोलेस्ट्रॉल देखकर हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े जोखिम की पूरी तस्वीर समझना पर्याप्त नहीं हो सकता। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल, नॉन-एचडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड जैसे अलग-अलग वसा संबंधी संकेतकों को भी देखा जाता है। कुछ लोगों में एलपी(ए) और एपीओबी जैसे अतिरिक्त संकेतक भी हृदय संबंधी जोखिम को समझने में मदद कर सकते हैं।
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, परिवार में हृदय रोग का इतिहास व्यक्ति के अपने जोखिम को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में कम उम्र में हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास आनुवंशिक जोखिम की संभावना की ओर भी संकेत कर सकता है।
धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसी जीवनशैली से जुड़ी आदतें भी हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। बहुत अधिक शराब का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, उम्र और पारिवारिक इतिहास जैसे कुछ जोखिम कारकों को बदला नहीं जा सकता, लेकिन धूम्रपान और खराब खान-पान जैसे कई कारकों में बदलाव करके जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके अलावा नींद और तनाव भी हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) के अनुसार, नींद और तनाव हृदय स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण कारक हैं। इसलिए सिर्फ जांच की रिपोर्ट सामान्य आने पर जीवनशैली से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज करना सही नहीं है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।