Heat Stroke vs Heat Exhaustion: Heat Stroke और Heat Exhaustion में क्या फर्क है? जानिए गर्मी में होने वाली इन बीमारियों के लक्षण, खतरे और बचाव के आसान उपाय।
Heat Stroke vs Heat Exhaustion: गर्मी का मौसम आते ही तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और इसके साथ ही हीट से जुड़ी बीमारियां भी बढ़ जाती हैं। इनमें सबसे आम हैं Heat Exhaustion और Heat Stroke। दोनों ही ज्यादा गर्मी और शरीर में पानी की कमी की वजह से होते हैं, लेकिन इनकी गंभीरता अलग होती है।
Heat Exhaustion एक तरह से शरीर का चेतावनी संकेत है कि अब वह ज्यादा गर्मी सहन नहीं कर पा रहा। जब हम बहुत पसीना बहाते हैं और शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो यह समस्या शुरू होती है। इसके कुछ आम लक्षण हैं, चक्कर आना, कमजोरी और थकान, सिर दर्द, मतली या उल्टी, मांसपेशियों में ऐंठन, बहुत ज्यादा पसीना आना, त्वचा ठंडी और चिपचिपी लगना शामिल है। अक्सर लोग इन लक्षणों को “सिर्फ गर्मी लगना” समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर खतरनाक हो सकता है।
Heat Stroke एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, जो 40°C या उससे ज्यादा हो सकता है। इसके त्वचा गर्म और सूखी हो जाना, तेज धड़कन, कन्फ्यूजन या बेहोशी, तेज सिर दर्द, उल्टी, दौरे पड़ना (seizures) लक्षण हैं। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा भी हो सकता है और शरीर के अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
कई बार हम शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे बहुत ज्यादा प्यास लगना, चिड़चिड़ापन, थकान या मांसपेशियों में खिंचाव। ये सभी संकेत बताते हैं कि शरीर ओवरहीट हो रहा है और उसे तुरंत ठंडा करने की जरूरत है।
कुछ लोगों में हीट से जुड़ी बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है:
अगर किसी को Heat Exhaustion हो उसे तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं। लेटने दें और आराम कराएं। पानी या ORS पिलाएं। गीले कपड़े या ठंडी पट्टी लगाएं। पंखा या कूलर का इस्तेमाल करें। अगर 30 मिनट में सुधार न हो, तो डॉक्टर के पास ले जाएं। अगर Heat Stroke के लक्षण दिखें तुरंत मेडिकल मदद लें। शरीर को जल्दी ठंडा करने की कोशिश करें। ठंडी पट्टी या पानी डालें।