
पर्याप्त नींद, शरीर ही नहीं मन के लिए भी जरूरी है। कम नींद से वयस्कों में बीमारियां होती और याद्दाश्त भी कम होने लगता है। वहीं, बच्चों का शारीरिक विकास प्रभावित होता है। ‘वल्र्ड स्लीप डे’ इस वर्ष 19 मार्च को मनाया जा रहा है। इसकी थीम ‘रेगुलर स्लीप हैल्दी फ्यूचर’ है।
रात में सोना क्यों जरूरी
कुछ लोग रातभर काम या यात्रा के दौरान जागते रहते हैं। अधिकतर लोगों को लगता है कि अगर रात में नहीं सोते हैं तो दिन में सोकर नींद पूरी कर लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। सोते समय शरीर में ग्रोथ हार्मोंस रिलीज होते हैं। इनमें अधिकांश हार्मोंस केवल रात को ही स्रावित होते हैं। दिन में सोने से थकान थोड़ी-बहुत दूर हो सकती है, लेकिन ग्रोथ हार्मोंस की भरपाई नहीं होती है। यही वजह है कि जो रात में जागते हैं और दिन में सोते हैं उनकी इम्युनिटी कम हो जाती है। हार्मोन का असंतुलन होने लगता है। उनमें लाइफस्टाइल डिसऑर्डर जैसे ब्लड शुगर, थायरॉइड आदि की समस्या शुरू हो जाती है।
मोबाइल से दूरी बनाएं, किताबें पढ़ें
नींद नहीं आने का बहाना बनाकर अधिकतर युवा मोबाइल देखते रहते हैं। समस्या भी यहीं से शुरू होती है। इससे न केवल आंखों की नमी कम होती है, बल्कि आंखों में जलन होने से नींद नहीं आती है। अगर किसी को नींद नहीं आती है तो मोबाइल या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स से दूरी बना लें। संभव हो तो कुछ अच्छी किताबें पढ़ें। किताबें पढऩे से न केवल अच्छी नींद आती है, बल्कि कम समय में पर्याप्त नींद का भी अनुभव होता है।
देर रात तक की पार्टी की धारणा को बदलें
हर व्यक्ति को न्यूनतम सात घंटे की नींद जरूरी है। कम होने पर मानसिक रोगों की आशंका बढ़ती है। अच्छी नींद के लिए समय पर सोएं और सुबह जल्दी उठें। योग-प्रायाणम करें। देर रात तक पार्टी की धारणों को बदलें। इससे रिलेक्स नहीं होते हैं, बल्कि कई कारणों से तनाव बढ़ता है। सोने से 3-4 घंटे पहले से ही चाय, कॉफी या अल्कोहल से दूरी बना लें। डिनर 7-8 बजे के बीच लें। भरपेट खाना न खाएं। अपच से भी दिक्कत होती है। सोने से पहले एक गिलास गुनगुना दूध पीएं। यदि म्यूजिक पसंद है तो हल्की आवाज में गाने भी सुन सकता है।